ऐ भाई, जरा देख के चलो, ये गड्ढे हैं जानलेवा
- जरा सी बरसात में भर जाते हैं लबालब, दुर्घटना की आशंका
- निगम अधिकारी सारी स्थिति जानने के बाद भी मौन साधे हुए हैं
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सावधानी हटी और दुर्घटना घटी, ये कहावत यूं ही नहीं बनी। दरअसल, औद्योगिक नगरी की सड़कों के ऊपर पूरी तरह से चरितार्थ होती है। वैसे तो औद्योगिक नगरी स्मार्ट सिटी बनने की ओर अग्रसर है लेकिन यहां के जानलेवा गड्ढे स्मार्ट सिटी बनने के दावे पर सवाल उठाते हैं। यहां जरा सा ध्यान भटका नहीं कि जान गई। ये हाल यहां की व्यस्त सड़कों का ज्यादा है।
स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करने वाले नगर निगम के अधिकारी सब कुछ जानने के बाद भी अपनी आंखें मूंद कर बैठे हैं। बरसात के दिनों में वैसे ही गड्ढों में पानी जमा हो जाने के बाद पता नहीं चलता है और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी सड़कों में गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। साथ ही शीर्ष अदालत ने गड्ढों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों के परिवारों को मुआवजा देने की भी बात कही है। शनिवार को अमर उजाला टीम ने शहर की सड़कों में गड्ढों का जायजा लिया।
ये गड्ढे रात को ज्यादा खतरनाक
शहर के औद्योगिक क्षेत्र में रोजाना करोड़ों रुपये का कारोबार होता है और हजारों वाहन आते जाते हैं। इसके बावजूद यहां सड़कों की हालत काफी खस्ता है। औद्योगिक सेक्टर की हर सड़क में छोटे-बड़े तीन से चार गड्ढे हैं। औद्योगिक सेक्टर में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के अलावा यहां आने वाले लोग इनमें धक्के खाते हुए गुजरते हैं। बरसात में तो बुरा हाल हो जाता है। जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण गड्ढों वाली सड़क और ज्यादा जानलेवा हो जाती है। रात को उद्योगों से छुट्टी होने के बाद निकलने वाले कर्मचारियों को गड्ढों का पता नहीं चल पाता है और वे इसमें गिरकर चोटिल हो जाते हैं।
सीवर लाइन डालने को जगह-जगह खोद डाला
प्याली से सारन और वहां से व्हर्लपूल चौक तक यदि जाना तो थोड़ा संभलकर वाहन चलाएं। इस पूरी रोड को नगर निगम ने सीवर लाइन डालने के लिए जगह-जगह से खोदा और फिर छोड़ दिया। अभी तक इन गड्ढों को भरा नहीं गया है। जवाहर कॉलोनी, पर्वतीय कॉलोनी को जाने वाले हजारों लोग रोजाना यहां से गुजरते हैं और अक्सर दुर्घटना का शिकार भी होते हैं। इसके बावजूद नगर निगम सुध नहीं ले रहा है। निगम का कहना है कि काम समाप्त होने के बाद सड़क बनाई जाएगी, तब तक न जाने कितने लोग घायल होते रहेंगे।
फ्लाईओवर पर चढ़ते ही लगता है झटका
अजरौंदा चौक शहर का सबसे व्यस्त चौक है। नीलम फ्लाईओवर चढ़ते ही सड़क में बड़ा सा गड्ढा है। रात में अंधेरा होने पर उसका पता नहीं चलता और फ्लाईओवर पर चढ़ते ही झटका लगता है। बरसात के दौरान गड्ढे में पानी जमा हो जाने पर जाम की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा सेक्टर-48 की प्रमुख सड़क की हालत भी खस्ताहाल है। ये रोड सीधे बड़खल रोड को आपस में जोड़ती है। बारिश में यहां हर बार हादसे होते हैं, लेकिन गड्ढे अब तक नहीं भरे गए।
खुले सीवर मैनहोल भी बन रहे दुर्घटना का सबब
सड़कों में गड्ढों के अलावा शहर में जगह-जगह खुले सीवर के मैनहोल भी दुर्घटनाओं का सबब बन रहे हैं। पिछले दिनों डबुआ कॉलोनी में खुले मैनहोल में गिरकर एक मोटरसाइकिल सवार गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके बावजूद नगर निगम कोई सबक नहीं लेता है।
गड्ढे ने लील ली परिवार की खुशियां
टूटी सड़क के कारण वर्ष 2010 में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाटा मोड़ के निकट तीन साल के पवित्र की मौत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सेक्टर-19 निवासी मनोज वधवा पत्नी और बेटे पवित्र के साथ स्कूटर पर कहीं से आ रहे थे। बाटा चौक के पास गड्ढे में पहिया पड़ने से स्कूटर अनियंत्रित हो गया। सड़क पर गिरने के कारण पवित्र की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी के पैर खराब हो गए थे। इस घटना का दुखद पहलू यह है कि प्रशासनिक मशीनरी टूटी सड़क के कारण हुए हादसे के लिए सरकारी अधिकारियों को जिम्मेदार मानने को तैयार नहीं हैं।
कोट
सड़क पर बने गड्ढों के कारण सर्वाइकल की परेशानी बढ़ जाती है। सर्वाइकल पीड़ितों के लिए इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव है। स्वस्थ व्यक्ति की कमर में दर्द का सबसे बड़ा कारण भी सड़क के गड्ढे ही हैं। लगातार गड्ढे वाली सड़क पर वाहन चलाने से रीढ़ की हड्डी में परेशानी होने लगती है और शरीर का तालमेल बिगड़ जाता है।
-डा. विरेंद्र यादव, प्रभारी बीके सिविल अस्पताल
शहर मबए किसी भी सड़क से निकलों गड्ढों से आपका सामना जरूर होगा। मैं सािरन का रहने वाला हूं और पिछले करीब छह-आठ माह से यहां खुदाई करके सड़क में गड्ढे छोड़ दिए गए हैं और रोज ही कोई न कोई इनमें गिरकर घायल होता है।
- विरेंद्र सिंह, सारन
मैं यहां एक कंपनी में काम करता हूं। सुबह शाम गड्ढों के कारण पूरे औद्योगिक क्षेत्र में जाम की स्थिति रहती है। इतना ही नहीं रात को कई बार हमारे साथी आते जाते हैं तो पता ही नहीं चलता की गड्ढे कहां हैं और वाहन अनियंत्रित होने पर घायल हो जाते हैं।
- नीरज शर्मा, नंगला एन्क्लेव
गौंछी, जीवन नगर, सेक्टर-55 के अलावा शहर के कई प्रमुख इलाकों में सड़कों में गड्ढों की भरमार है। कई बार तो ऐसा लगाता है कि सड़कों में गड्ढे हैं या फिर गड्ढों में सड़क है। गड्ढों से बचकर निकले के दौरान कई बार हादसा हो जाता है।
- संजीव कुमार, गौंछी
शहर की सड़कों के नवनिर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। जहां कहीं भी गड्ढों की शिकायत आती है, वहां जल्द ही गड्ढों की मरम्मत का काम करवा कर उसे ठीक करवा दिया जाता है। प्याली-सारन चौक के आसपास सीवर लाइन डालने का काम तेजी से चल रहा है और उसके पूरा होते ही सड़क बना दी जाएगी।
- डीआर भास्कर, मुख्य अभियंता, नगर निगम