समूह नृत्य से बताया...क्या होता है मां-बाप का प्यार, क्यों नहीं पढ़ सकती बेटी
फरीदाबाद। सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले की चौपाल पर बृहस्पतिवार गीत संगीत के बीच समूह नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों से सामाजिक दायित्व के प्रति नैतिक कर्तव्य निभाने का संदेश दिया गया। एक के बाद एक मनोरंजन व दिल को छू लेने वाली प्रस्तुति से पर्यटक दिनभर संगीत के सूत्र में बंधे रहे। विद्यार्थियों ने ‘क्या होता है मां बाप का प्यार और क्यों नहीं पढ़ सकती बेटी’ थीम पर समूह नृत्य प्रस्तुत किया। इसके अलावा देश विदेश के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरी।
ट्यूनिशिया के कलाकारों ने उनके देश में खुशी व खास अवसरों पर बजाए जाने वाले परंपरागत गीत-संगीत की प्रस्तुति को पर्यटकों ने खूब सराहा। अर्जेंटीना के टोंगो ग्रुप ने फुटबाल सॉन्ग से लोगों की तालियां बटोरी। इसके बाद महाराष्ट्र की संस्कृति में रचे बसे कोकन व पालकी नृत्य ने सबको तालियां बजाने पर विवश कर दिया। दक्षिण सुडान, सैलिस सांगा, वरूंडी का ड्रम डांस, व कुबां नृत्य सहित पंजाब के कलाकारों ने मिर्जा जट सहित दर्जनों कार्यक्रमों ने बड़ी चौपाल पर दिनभर समां बाधे रखा।
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच मेले के सहयोगी देश (पार्टनर कंट्री) थाईलैंड के कलाकारों ने अपने पारंपरिक लोक संगीत व नृत्य के साथ प्रस्तुति देकर दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। थाईलैंड के कलाकारों ने अपने देश में मेहमानों के स्वागत में गाए जाने वाले लोक गीत से चौपाल में उपस्थित पर्यटकों का खूब मनोरंजन किया। थाईलैंड के कलाकारों ने अपनी दमदार प्रस्तुति से यह साबित किया कि संगीत की कोई भाषा नहीं होती केवल भावना के दम पर ही वो दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।