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सूरजकुंड मेला : नहीं मिला दूभाषिया तो माल बेचने को हायर की स्थानीय युवतियां

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सूरजकुंड मेला - फोटो
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दुभाषियों का काम कर रहीं स्थानीय युवतियां
-विदेशी शिल्पकारों ने दैनिक वेतन पर अपने उत्पाद बेचने को रखा

- 600 रुपये प्रतिदिन और मेले में एंट्री टिकट दिया जा रहा है
- 28 देशों के शिल्पकारों ने लगाए हैं स्टॉल
- कुछ दुकानदारों को उनके दूतावास से मिली है मदद

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में आए विदेशी शिल्पकारों ने मेला प्राधिकरण की ओर से दुभाषिया नहीं मिलने पर अपना माल बेचने के लिए स्थानीय युवतियों को दैनिक वेतन पर नौकरी पर रखा है। प्रत्येक युवती को दुभाषिए की भूमिका निभाने के लिए छ सौ रुपये प्रतिदिन और मेले में एंट्री टिकट खरीदकर दिया जाता है। उधर, कुछ विदेशी दुकानदारों को उनके दूतावास से दुभाषिये की मदद मिल गई है। मेले में विदेशी शिल्पकारों को दूभाषिया नहीं मिलने के कारण आ रही परेशानियों को लेकर अमर उजाला ने पिछले दिनों खबर प्रकाशित की थी। सीरिया के शिल्पकारों ने तो अपने सामान को काउंटर पर सजाने के साथ ही वहां कागज पर सामान का रेट लिख दिया है।
अंतरराष्ट्रीय दर्जा प्राप्त कर चुके सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में इस साल किर्गिस्तान बतौर पार्टनर कंट्री शामिल हुआ है। किर्गिस्तान के अलावा 28 देशों के शिल्पकारों ने भी मेले में अपने स्टॉल लगाए हैं। हालांकि उनके सामने भाषा की दिक्कत आ रही है। अंग्रेजी का ज्ञान नहीं होने के कारण वे अपनी बात व सामान की खासियत दर्शकों को नहीं बता पाते। ऐसे में उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। परेशानी बढ़ी तो पिछले दिनों कुछ विदेशी शिल्पकारों ने भारत में अपने-अपने दूतावासों में संपर्क किया था। इनमें से ट्यूनेशिया के शिल्पकारों को उनके दूतावास से दुभाषिया उपलब्ध कराया गया है।
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तुर्किस्तान के स्टॉल पर मौजूद अंजली व अकांक्षा ने बताया कि वे दिल्ली की रहने वाली हैं। स्टॉल संचालक अकबर मेले में कांच के झूमर लेकर आए हैं, जोकि बेहद आकर्षक हैं। दिक्कत यह है कि अकबर को हिंदी-इंग्लिश का ज्ञान ही नहीं है। अब अकबर ने उन दोनों को छह सौ रुपये प्रति दिन के हिसाब से रखा है। साथ ही दोनों की मेले में प्रवेश टिकट के पैसे भी वे ही देते हैं। इसी तरह किर्गिस्तान से आई गुलीजान भी अपने एक हिंदुस्तानी दोस्त की मदद ली है। पिछले कुछ दिनों से गुलीजान के दोस्त की मां अंजू किर्गिस्तान की स्टॉल पर गुलीजान के साथ उसका सामान बिकवाने में मदद कर रहीं हैं।
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