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नाबालिग नौकरानी के कूदने का मामला:

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नाबालिग नौकरानी के कूदने का मामला:
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राज्य बाल संरक्षण आयोग सदस्य ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया
- डीसी को जांच कमेटी गठित कर पुलिस की भूमिका की जांच करने के आदेश दिए
- माता पिता को नहीं सौंपी जाएगी किशोरी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर 37 स्थित कनिष्का टावर की ग्यारहवीं मंजिल से नाबालिग नौकरानी के कूदने के मामले की जांच करने शुक्रवार को राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बालकृष्ण गोयल औद्योगिक नगरी पहुंचे। उन्होंने घायल बच्ची को अस्पताल मेें भर्ती करवाया और मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए जिला उपायुक्त को एडीसी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में जांच कमेटी गठित करने के आदेश जारी किए। उन्होंने बच्ची और कनिष्का टावर में रहने वाले सभी पड़ोसियों के बयान दर्ज किए।
मालूूम हो कि कनिष्का टावर की ग्यारहवीं मंजिल स्थित फ्लैट में रहने वाली बीटेक छात्रा की 14 वर्षीय नौकरानी ने बुधवार दोपहर बालकनी से छलांग लगा दी थी। पक्षियों से बचाव के लिए लगाए गए जाल में उलझ कर किशोरी दसवीं मंजिल पर बंद पड़े फ्लैट की बालकनी में गिर कर बेहोश हो गई थी। बचाई गई किशोरी के शरीर पर चोट और झुलसाए जाने के निशान पाए गए थे। टावर में रहने वालों ने किशोरी को शारीरिक-मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था। बावजूद इसके पुलिस ने महज बंधुआ मजदूर बनाने की धारा में केस दर्ज किया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बच्ची ने यह बयान दिया था कि उसकी तनख्वाह उसके माता पिता को दी जाती है। मामला मीडिया में आने पर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने इसका संज्ञान लिया और राज्य बाल संरक्षण आयोग से इसकी रिपोर्ट तलब की।
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मामले की जांच करने राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य बालकृष्ण गोयल शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे शहर पहुंचे। एक चाइल्ड वेलफेयर होम में रखी गई बच्ची से मिले। कमजोर शरीर पर चोटों के निशान देखते हुए बच्ची को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में बच्ची की सुरक्षा और पहचान गुप्त रखने के पुख्ता इंतजाम करने के आदेश डीसी को दिए। उन्होंने बच्ची के बयान दर्ज किए। इसके बाद पुलिस अधिकारियों से एफआईआर और अभी तक की गई जांच की जानकारी मांगी। महज बंधुआ मजदूरी की धारा लगाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और तुरंत ही इसमेें मारपीट, नाबालिग को बंधक बनाने, इच्छा के विपरीत काम कराने की धाराएं जोडने के आदेश दिए। पुलिस की जांच से असंतुष्ट आयोग सदस्य ने डीसी को आदेश दिया कि एडीसी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में जांच कमेटी गठित करे और पुलिस की भूमिका सहित मामले की जांच रिपोर्ट तैयार करे। उन्होंने एसएचओ सराय अनिल कुमार और जांच अधिकारी बिजेंद्र सिंह के भी बयान दर्ज किए। बाल कृष्ण गोयल देर शाम कनिष्का टावर पहुंचे। वहां उन्होंने बीटेक छात्रा के पड़ोसियों और टावर में रहने वाले अन्य लोगों से बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए। देर शाम तक चली कार्रवाई में उनके साथ सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष एचएस मलिक, डीसी, एडीसी बल्लभगढ़, डीसीपी बाल संरक्षण आदि मौजूद रहे।
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वर्जन
यह बहुत ही दुखदायी घटना है, बच्ची से भारी क्रूरता की गई है, हमारी तरफ से पीड़िता को सारी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। बच्ची ने बताया कि उसकी तनख्वाह माता-पिता ले लेते हैं। पीड़िता को उसके माता पिता को नहीं सौंपा जाएगा। घटना से संबंधित सभी लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं इसकी रिपोर्ट बना कर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को भेजी जाएगी।
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