गीले कचरे से खाद और सूखे कचरे से तैयार होगा ईंधन
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में बढ़ते कचरे के दबाव और डंपिंग साइट पर लगातार बढ़ते बोझ के बीच नगर निगम ने मुजेड़ी स्थित सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट को फिर से सक्रिय करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। इस परियोजना के तहत रोजाना 150 टन कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण का लक्ष्य तय किया गया है। माना जा रहा है कि यह पहल शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ कचरा प्रबंधन के मौजूदा संकट को कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
पिछले कुछ वर्षों में शहर में कचरे की मात्रा तेजी से बढ़ी है, जबकि उसके निस्तारण की व्यवस्था उसी अनुपात में मजबूत नहीं हो सकी। शहर से अब रोजाना करीब 900 टन कचरा निकल रहा है। कचरे का अधिकतर हिस्सा बंधवाड़ी लैंडफिल पर भी जा रहा है। लेकिन अब निगम अपने कचरे को यहीं पर निस्तारित करने के लिए योजना पर काम कर रहा है। वहीं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती और स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत तय मानकों को देखते हुए नगर निगम प्रभावी कचरा प्रबंधन के लिए काम कर रहा है। यही कारण है कि अब छोटे-छोटे प्रोसेसिंग प्लांट विकसित करने की दिशा में काम तेज किया गया है।
एक साल का संचालन मॉडल
इस परियोजना के तहत मुजेड़ी प्लांट में प्रतिदिन 150 टन कचरे की प्रोसेसिंग की जाएगी। इसके संचालन की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को सौंपी जाएगी जिसे शुरुआत में एक वर्ष के लिए काम दिया जाएगा। यदि एजेंसी का प्रदर्शन संतोषजनक रहता है तो अनुबंध को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। निगम ने इस बार परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट वित्तीय और तकनीकी मानक तय किए हैं ताकि काम की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
कृषि या बागवानी में इस्तेमाल किया जा सकेगा खाद
परियोजना की खास बात यह है कि इसमें कचरे को सिर्फ निपटाने के बजाय उससे उपयोगी उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया गया है। गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी जिसे कृषि या बागवानी में इस्तेमाल किया जा सकेगा और बाजार में बेचा भी जा सकेगा। वहीं सूखे कचरे से आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) तैयार किया जाएगा जिसका उपयोग सीमेंट उद्योग और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इससे कचरे का बोझ कम होने के साथ-साथ आय के नए स्रोत विकसित होने की भी संभावना है।
डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता पर जोर
इस बार नगर निगम ने निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है। प्लांट के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स के अलावा प्रोसेसिंग यूनिट के महत्वपूर्ण हिस्सों पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे जिनकी लाइव फीड सीधे निगम मुख्यालय से जुड़ी रहेगी। इसके साथ ही प्लांट पर आने वाले हर वाहन का वजन धर्मकांटे पर दर्ज किया जाएगा और यह डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड होगा। एजेंसी को रोजाना कचरे के इनपुट और उससे निकलने वाले आउटपुट की विस्तृत रिपोर्ट भी अपलोड करनी होगी। इस व्यवस्था से गड़बड़ी, हेरफेर या लापरवाही की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
परियोजना में नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। यदि एजेंसी तय समय में मशीनरी स्थापित नहीं करती या काम में देरी करती है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। लगातार खराब प्रदर्शन की स्थिति में अनुबंध रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा प्रोसेसिंग के दौरान आग लगने, अत्यधिक दुर्गंध फैलने या पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन होने पर पूरी जिम्मेदारी एजेंसी की होगी और उस पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इससे यह साफ संकेत दिया गया है कि निगम इस बार किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
बंधवाड़ी पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
फिलहाल फरीदाबाद का बड़ा हिस्सा कचरा निस्तारण के लिए बंधवाड़ी प्लांट पर निर्भर है जिससे वहां भी क्षमता से अधिक दबाव बना हुआ है। मुजेड़ी प्लांट के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर कचरे का निस्तारण संभव होगा और बंधवाड़ी भेजे जाने वाले कचरे की मात्रा में कमी आएगी। इससे परिवहन लागत घटेगी और पर्यावरणीय दबाव भी कम होगा।
अप्रैल-मई में संचालन शुरू होने की उम्मीद
नगर निगम की योजना है कि अप्रैल और मई के बीच सभी प्रक्रियाएं पूरी कर प्लांट को चालू कर दिया जाए। यदि यह परियोजना तय समय पर और प्रभावी तरीके से लागू होती है तो शहर में कचरे के ढेर कम होने, डंपिंग साइट्स पर दबाव घटने और सफाई व्यवस्था में सुधार के स्पष्ट परिणाम देखने को मिल सकते हैं। स्थानीय लोगों को भी इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि लंबे समय से कचरे और उससे फैलने वाली गंदगी शहर की एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए निगम गंभीरता से हर स्तर पर काम कर रहा है। आम लोगों से भी अपील है कि निगम के अभियान में सहयोग करें और अपने शहर को स्वच्छता के नए मानक पर ले जाएं। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त