फरीदाबाद। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की तरफ से राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित सेक्टर-20ए में शनिवार को तीसरे दिन फिर अवैध कब्जों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई। तोड़फोड़ दस्ते ने 15 पक्के मकानों को कुछ ही देर में धराशायी कर दिया, साथ ही झुग्गियों को ढहा दिया गया। मौके पर लोगों ने एचएसवीपी की कार्रवाई का जमकर विरोध किया मगर भारी पुलिस बल तैनात होने के कारण पुलिस ने लोगों को दूर कर दिया।
एचएसवीपी अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-20ए की जमीन का प्राधिकरण कई साल पहले अधिग्रहण कर चुका है। इसके बाद धीरे-धीरे कब्जा होना शुरू हो गया था। यहां कुछ साल में देखते ही देखते सैकड़ों मकान और झुग्गियां बन गईं। यहां पड़ी खाली जमीन पर काफी अवैध निर्माण बन गए हैं। अब एचएसवीपी को कब्जे से संबंधित मामले में एक शपथ पत्र सुप्रीम कोर्ट में जमा करना है, इसलिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तोड़फोड़ की। इस दौरान 15 से ज्यादा पक्के मकान भी ढहा दिए गए हैं।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के प्रशासक प्रदीप दहिया और संविदा अधिकारी परमजीत चहल ने तोड़फोड़ दस्ते की निगरानी की। मौके पर कनिष्ठ अभियंता प्रेम प्रकाश मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जों को लेकर विभाग काफी सख्त है। तोड़फोड़ की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। लोग स्वयं मकानों और झुग्गियों को खाली कर दें, तोड़फोड़ के दौरान होने वाले नुकसान के लिए एचएसवीपी जिम्मेदार नहीं होगा।
स्थानीय निवासी बोले-कॉलोनी अवैध है तो बसने ही क्यों दिया था
एचएसवीपी का तोड़फोड़ दस्ता शनिवार सुबह करीब 10 बजे सेक्टर-20ए में तोड़फोड़ कार्रवाई के लिए पहुंचा। मौके पर लोगों की भारी भीड़ एकत्र हो गई। महिलाओं ने अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी और अधिकारियों को उनके मकानों को तोड़ने के लिए मना कर करने लगीं। मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने महिलाओं को घरों से बाहर कर दिया और कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
स्थानीय निवासी दीपक ने बताया कि हमने करीब दस साल पहले जीवन भर की कमाई तीन मंजिला मकान बनाकर खर्च कर दी है। इस पर अब प्राधिकरण तोड़फोड़ कर रहा है। यदि कॉलोनी अवैध है तो बसने ही क्यों दिया था। निर्माण के समय भी इस पर रोक लगाई जा सकती थी। अब बसे बसाए घरों को तोड़ जनता के साथ अन्याय किया जा रहा है। इसी तरह रोशन अरोड़ा ने भी आशियाना उजड़ने पर दुख बयां किया। स्थानीय निवासी श्यामा ने भी घरों का तोड़े जाने का कड़ा विरोध किया।