भैयादूज पर्व पर बहनों को भाइयों के पास पहुंचने में जूझना पड़ा
12 लाख रुपये के राजस्व का हुआ नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। भैयादूज के दिन रोडवेज की बसें नहीं चलने की वजह से बहनों को अपने भाईयों के घर पर पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं दीपावली की छुट्टियां खत्म होने के बाद अपने-अपने कार्य पर जा रहे लोग भी निजी वाहनों के जरिए अपने अपने गंतव्य तक पहुंचे। 12 नवंबर को अंबाला बस स्टैंड में रोडवेज कर्मचारी राजवीर की हत्या के बाद परिजनों को न्याय दिलाने के लिए रोडवेज के सांझा मोर्चा ने मंगलवार की शाम को चक्का जाम की घोषणा कर दी। जिसके चलते बुधवार को 162 बसों में से किलोमीटर स्कीम वाली मात्र 17 बसें विभिन्न रूटों पर सुबह के समय चलाई गईं।
डिपो से हर रोज चंडीगढ़, गुरुग्राम, दिल्ली, पलवल, हरिद्वार, जयपुर, खाटू श्याम सहित विभिन्न रूटों के लिए बसें चलाई जाती हैं। इन बसों में करीब 10 हजार यात्री सवार होकर अपने गंतव्य के लिए सफर करते हैं, लेकिन बुधवार की सुबह जब यात्री बस स्टैंड पर पहुंचे, तो उन्हें रोडवेज हड़ताल की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। काफी देर इंतजार करने के बाद यात्रियों को या तो मायूस होकर अपने घर वापस लौटना पड़ा या फिर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी भैयादूज पर जिन को अपनी बहन के घर जाना था या फिर किसी बहन को अपने भैया के यहां आना था उनको हुई है।
किलोमीटर स्कीम वाली चली 17 बसें
डिपो से हर रोज कुल 162 बसें विभिन्न रूटों पर चलाई जाती हैं। जिसमें बुधवार को हड़ताल होने की वजह से सुबह आठ बजे से पहले 17 किलोमीटर स्कीम वाली बसों को डिपो से रवाना कर दिया गया। किलोमीटर की सभी बसें बीएस 4 की हैं। इन बसों को बुधवार चंडीगढ़ रूट पर जाने के कुंडली गाजियाबाद पलवल (केजीपी) के रास्ते पानीपत से चंडीगढ़ भेजी गईं। हर रोज चंडीगढ़ रूट पर बीएस 6 की बसों का संचालन किया जाता है। जो दिल्ली से होकर गुजरती थीं, लेकिन हड़ताल की वजह से दो बसों को केजीपी के रास्ते चंडीगढ़ भेजा गया। वहीं अन्य बसें जयपुर, गुरुग्राम, आगरा, अलीगढ़ और पलवल संचालित की गईं। इन सभी बसों द्वारा एक चक्कर लगाने के बाद दोपहर बाद वापस आने पर डिपो के अंदर खड़ा कर दिया गया। इन सभी 162 बसों में हर रोज करीब 10 हजार यात्री सफर करते हैं।
जान जोखिम में डालकर किया सफर
रोडवेज की हड़ताल होने की वजह से यात्रियों ने निजी बसों व वाहनों में जान जोखिम में डालकर सफर किया। निजी वाहन डिपो के स्टैंड पर लगने से पहले ही यात्रियों व उनके परिजनों द्वारा भागकर बसों में सीट को रोकने की कोशिश करते हुए नजर आए। वहीं कुछ यात्री छोटे बच्चों को खिड़की के जरिए सीटें रोकने के लिए बसों में चढ़ाते हुए नजर आए। निजी बसों में सीटें नहीं होने के बावजूद यात्री खड़े होकर सफर करने को मजबूर थे। सबसे ज्यादा परेशानी यात्रियों को दूरदराज दूसरे जिलों में जाने को लेकर हुई। बसें बंद होने की वजह से दिल्ली व गुड़गांव रूट पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिला।
मेट्रो और ट्रेन से किया सफर
यात्रियों ने अपने घरों पर पहुंचने के लिए मेट्रो और ट्रेन का सहारा लिया। जिन लोगों को रोहतक, झज्जर, भिवानी, चंडीगढ़ आदि जाना था। वह मेट्रो के जरिए दिल्ली अंतरराज्यीय बस टर्मिनल पर पहुंचे। उसके बाद वह उसे निजी बस व वाहनों के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंचे। वहीं जिन यात्रियों को आगरा, अलीगढ़, मथुरा, होडल आदि जिलों में जाना था, वह बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन से ट्रेन के जरिए अपने स्थान तक पहुंचे। भैयादूज होने की वजह से बहनों को अपने भाईयों के घर पहुंचने में सुबह से दोपहर हो गई। वहीं कुछ बहनों ने अपने भाईयों के घर जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
यात्रियों ने बताई परेशानी
राजीव कॉलोनी निवासी राजकुमार ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ भैयादूज व छठ पूजा मनाने के लिए बुधवार की सुबह निकले थे। सुबह करीब 11 बजे जब वह डिपो पर पहुंचे तो उनको पता चला कि रोडवेज की हड़ताल है। जिसके बाद वह निजी बस के जरिए आगरा जाने के लिए डिपो के बाहर हाईवे पुल के नीचे गए। यूपी रोडवेज की आगरा जाने के लिए काफी संख्या में बसें आईं, लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से वह परिवार व सामान के साथ नहीं चढ़ पाए। ढाई घंटे इधर-उधर भटकने के बाद परिवार को परेशान देखते हुए वापस घर चले गए। शिव चरण ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ रोहतक जाने के लिए घर से दोपहर एक बजे निकले थे। क्योंकि डिपो से रोहतक के लिए दो बजे बसें रवाना होती हैं। डिपो पर पहुंचने के बाद उनको पता चला कि रोडवेज की हड़ताल होने की वजह से आज कोई भी बस नहीं जाएगी। जिसके चलते उन्होंने रोहतक जाने के लिए पहले गुरुग्राम की बस ली। उसके बाद गुरुग्राम से निजी वाहन के जरिए वह अपने परिवार के साथ रोहतक जाएंगे।
प्रशासन व पुलिस मुस्तैद
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर प्रशासन भी मुस्तैद दिखाई दिया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन व पुलिस की ओर से पूरी तैयारी की हुई थी। डिपो के अंदर जहां हर रोज रोडवेज की बसें खड़ी होती थीं और यात्री बसों का इंतजार करते हुए नजर आते थे। वहीं बुधवार को हड़ताल होने की वजह से डिपो के अंदर पांच पीसीआर तैनात रहीं। इसके अलावा काफी मात्रा में पुलिस बल भी मौजूद रहा। जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थी। इसके अलावा उच्च अधिकारियों द्वारा समय-समय पर नियमित रूप से जांच की गई।
हड़ताल से यात्री रहे परेशान
बसें न चलने से निजी वाहनों में डेढ़ गुना अधिक किराया देकर यात्रा करके अपने भाई के घर आई हूं। - ज्योति, यात्री
गुरुग्राम जाने के लिए रोडवेज से दोगुना किराया निजी बस में देना पड़ा। उसके बाद ही वह अपने गंतव्य तक पहुंचे। - मनीष, यात्री
सुबह डिपो से चंडीगढ़ के लिए पहली बस लेने के लिए आया था, लेकिन हड़ताल होने की वजह से वह मेट्रो के जरिए दिल्ली गए, उसके बाद चंडीगढ़ के लिए वाहन लेंगे। - सतीश, यात्री
एनआईटी डिपो पर बस लेने के लिए गई, लेकिन डिपो से बस नहीं मिलने पर वह बल्लभगढ़ डिपो आई, लेकिन बल्लभगढ़ से भी बस नहीं मिलने पर वह अपने घर वापस जा रही है। - श्रेया, यात्री
कर्मचारियों का कहना
उनकी मंशा किसी भी यात्री को परेशान करने की नहीं है। वह तो केवल अपने मृत साथी कर्मचारी के परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इसलिए उन्होंने हड़ताल की है। मांग पूरी होने के बाद हड़ताल को खत्म कर दिया जाएगा। - जयपाल राठी, प्रधान, सर्व कर्मचारी संघ
हमें भी यात्रियों को परेशान करना अच्छा नहीं लगता है, लेकिन अंबाला के चालक राजबीर को इंसाफ दिलाने के लिए यह हड़ताल की गई है। - रविंद्र नागर, सचिव, सर्व कर्मचारी संघ