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पाकिस्तान से भारत तक हिंदी साहित्य का सफर

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हिंदी साहित्य के प्रति युवाओं को जागरुक करते हैं कुंद्रा

फरीदाबाद। हिंदी साहित्य के प्रति 72 वर्षीय बुजुर्ग का जुनून आज भी देखते ही बनता है। फरीदाबाद में पिछले 42 साल से हिंदी साहित्य का कलेक्शन का एकमात्र बुक स्टोर चलाने वाले बुजुर्ग जेके कुंद्रा की दुकान पर जब भी कोई इंग्लिश साहित्य की डिमांड करता है तो वह पहले उसे हिंदी साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी पूरी कोशिश रहती है कि इंग्लिश किताबों की मांग करने वाला युवा हिंदी साहित्य एक बार जरूर पढ़े। हिंदी साहित्य के लिए समर्पित कुंद्रा अब जल्द ही इसके लिए जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहे हैं।
हिंदी साहित्य की पुस्तकों के प्रेम में दीवाने जेके कुंद्रा बताते हैं कि उनके पिता ने भारत-पाक बंटवारे में लाहौर के शेखपुरा से जब दिल्ली का रुख किया तो यहां आकर फर्नीचर का व्यापार शुरु किया था। पारिवारिक बिजनेस छोड़ उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के पास स्थित अल्पना सिनेमा हाउस में हिंदी साहित्य स्टॉल शुरू किया। इमरजेंसी के दौरान स्टॉल हटाने का ऑर्डर आया तो उन्होंने फरीदाबाद के नेहरू ग्राउंड में अपने बुक स्टोर को शुरू किया। बुजुर्ग जेके कुंद्रा बताते हैं कि हिंदी साहित्य पढ़ने का रूझान अब बच्चों और युवाओं में नहीं रहा।
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...ताकि शहर को हो जाए पढ़ने की आदत
जेके कुंद्रा जल्द ही शहर में किताबी प्रेम जागरूक करने के लिए जागरुकता अभियान चलाने वाले हैं। वे चाहते हैं कि इस शहर को साहित्य पढ़ने की ललक पैदा हो। इससे भविष्य में उनके जैसे साहित्य किताबी प्रेमी अनंत तक इस प्यार में डूबे रहें। उनका कहना है कि युवाओं में किताबों के प्रति निरसता घर से जन्मी है। डिजिटल दुनिया के अभिभावक अपने बच्चों में साहित्य और बौद्धिक ज्ञान तलाशते हैं, जबकि खुद हर वक्त किताबों से दूर मोबाइल में गुम रहते हैं। यही कारण है कि वह जागरुकता अभियान चलाकर बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
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