प्रकृति ने ही भरा प्राकृतिक झील में पानी
- दो दशक से सूखी बड़खल झील में बरसात के बाद नजर आया पानी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में दो दिन से हो रही बारिश ने दो दशक से सूखी बड़खल झील की भी प्यास बुझा दी, हालांकि झील के महज दो से तीन फीसदी हिस्से में ही पानी आया है, लेकिन पर्यावरणविदों का मानना है कि इससे क्षेत्र के भूगर्भ जल स्तर में काफी सुधार आएगा।
विश्व की प्राचीनतम अरावली पहाड़ियों की प्राकृतिक बड़खल झील दो दशक पहले पानी से लबरेज हुआ करती थी। पहाड़ियों और प्राकृतिक छटा के कारण यह झील राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। दो दशक पहले अरावली की प्राकृतिक संपदा का दोहन करने की स्वीकृति सरकार ने दी थी। इन पहाड़ियों से कई लाख टन पत्थर का खनन किया गया। बड़खल झील के आसपास के इलाकों में करीब सात जगह माइनिंग की गई। इसका असर यह हुआ कि बड़खल झील का पानी दरारों जरिए नीचे स्थित खनन से बने इन गड्ढों में रिस गया। इससे यह गड्ढे तो कृत्रिम झीलों में तब्दील हो गए लेकिन इनसे ऊंचाई पर स्थित बड़खल झील सूख गई। यह झील करीब दो दशक से सूखी हुई है। मनोहरलाल सरकार पिछले चार साल से इस झील को भरने के प्रयास कर रही है लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली। बृहस्पतिवार को दिन भर और शुक्रवार को रात भर हुई बारिश से बड़खल झील में काफी पानी इकट्ठा हो गया, हालांकि बहुत बड़े इलाके में फैली इस झील के कुछ ही हिस्से में पानी जमा हुआ है। पर्यावरण प्रेमी वीर प्रताप शर्मा कहते हैं कि झील में जितना भी पानी आया है वह दो से तीन फीसदी ही है लेकिन इतने पानी से ही क्षेत्र के भूगर्भ जल स्तर में काफी सुधार होगा क्योंकि झील का यह पानी सीपेज के जरिए भूगर्भ में समा जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि शनिवार को भी बारिश होगी जिससे झील की थोड़ी बहुत प्यास और शांत होगी।