फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाजार में चोरी छिपे हो रही पटाखों की बिक्री

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
बाजार में चोरी छिपे हो रही पटाखों की बिक्री

फरीदाबाद। दिवाली पर प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से अस्थाई लाइसेंस नहीं जारी किए जाने के बावजूद पटाखों का कारोबार चोरी छिपे हो रहा है। प्रशासन और पुलिस की सख्ती के कारण पटाखों की दुकान तो नहीं लगाई गई, लेकिन आतिशबाजी खरीदने वालों को सारा सामान उपलब्ध हो रहा है। दिवाली मनाने के लिए लोग ग्रीन पटाखों के आने का इंतजार कर रहे हैं।
दिवाली केे बाद दिल्ली एनसीआर में कई दिनों तक फैले रहने वाले स्मॉग और प्रदूषण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य पटाखों की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने इस बार दिवाली पर पटाखों की दुकानें लगाने के लिए अस्थाई लाइसेंस भी जारी नहीं किए हैं। दिवाली पर बेचने के लिए कारोबारियों ने पटाखों का स्टॉक जमा कर लिया था, मगर लाइसेंस नहीं मिलने से दुकान नहीं लगा पा रहे हैं। ऐसे कारोबारी अब पटाखों की बिक्री चोरी छिपे कर रहे हैं।
विज्ञापन


मोहल्लों में घूम रहे एजेंट, घर पर ही पटाखों की डिलीवरी
कुछ कारोबारी एजेंट्स के जरिए लोगों के घरों में सीधे पटाखों की डिलीवरी दे रहे हैं तो कुछ ने मोहल्लों में किराने की छोटी दुकान, पान की दुकानों पर माल रख रहे हैं। इन दुकानदारों को यह भी हिदायत दी गई है कि मोहल्ले के बच्चों, परिवारों और परिचितों को ही पटाखा बेचें। कारोबारियों के एजेंट्स परिचित ग्राहकों से संपर्क कर घर पर ही पटाखों की सप्लाई कर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि माल स्टॉक करने में लाखों रुपये लगाए हैं, यदि इसे नहीं निकाला गया तो नुकसान होगा। इसलिए पटाखों की बिक्री के दूसरे रास्ते निकाले गए हैं। कारोबारी की मानें तो इस बार पिछली दिवाली के मुकाबले दस फीसदी पटाखे ही बिक पाए हैं। दुकानें नहीं लगने के कारण दिवाली तक इतने ही पटाखे और बिकने की उम्मीद है।

पुलिस आयुक्त कार्यालय प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि पारंपरिक पटाखों की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध है, इसलिए इनकी बिक्री नहीं होने दी जा रही है। ग्रीन पटाखों की बिक्री और जलाने पर प्रतिबंध नहीं है। बिना लाइसेंस किसी भी तरह के पटाखे नहीं बेचे जा सकते। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं पटाखों की बिक्री की जा रही है तो पुलिस को सूचना दें। सूबे सिंह ने बताया कि ग्रीन पटाखों के जलाने पर पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषकों की मात्रा 35 से 40 फीसदी तक घट जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ग्रीन पटाखे ही जलाएं और दो घंटे से ज्यादा आतिशबाजी न करें।
विज्ञापन

-----
तीन श्रेणियों के होते हैं ग्रीन पटाखे
- ग्रीन पटाखों की तीन श्रेणियां हैं। पहली सेफ वाटर रिलीजर (स्वास), दूसरी सेफ मिनिमल एल्यूनिनियम (सफल) और सेफ थरमाइट क्रैकर्स (स्टार)। स्वास पटाखों में प्रदूषक पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर खत्म की गई है।
- स्टार पटाखों में भी पोटेशियम नाइट्रेट का इस्तेमाल घटाया गया है।
- सफल पटाखों मेें एल्यूमिनियम तत्व की मात्रा भी घटा कर पांच से सात प्रतिशत कर दी गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें