निमोनिया के इलाज के लिए पार्क अस्पताल में भर्ती हुए मरीज की मौत पर शुक्रवार सुबह परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने मृतक मनोज के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। उधर, अस्पताल के डॉक्टर टीएस यादव का कहना है कि मरीज की हालत काफी गंभीर थी। इलाज के दौरान ही अचानक दिल की धड़कन रुकने से उसकी मृत्यु हो गई। मनोज के शव को फिलहाल बीके सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है।
दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में रहने वाले मनोज को निमोनिया की शिकायत पर दिल्ली के ओखला स्थित ईएसआई अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मनोज की पत्नी मीरा ने बताया कि ईएसआई से मनोज को फरीदाबाद सेक्टर-10 स्थित पार्क अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। बृहस्पतिवार शाम को ही उन्होंने मनोज को पार्क अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
मनोज के साले चंद्र प्रकाश भट्ट का आरोप है कि परिजनों को बताए बिना ही अस्पताल के डॉक्टरों ने मनमर्जी इलाज शुरू कर दिया। सही इलाज न मिलने पर मरीज की तबीयत बिगड़ती चली गई। परिजनों को इसके बारे में भी कुछ नहीं बताया गया। शुक्रवार सुबह मनोज की मृत्यु की खबर उन्हें दी गई।
उधर, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के डीन असीम दास का कहना है कि ईएसआईसी प्रबंधन किसी मरीज को दिल्ली से फरीदाबाद के किसी भी निजी अस्पताल में सीधे रेफर नहीं कर सकता। इसके लिए उन्हें संबंधित ईएसआईसी में मरीज को रेफर करना होता है। इसके बाद ही सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मरीज को रेफर किया जाता है।