माटी के मोल हो गई शहर की सबसे महंगी ग्रुप हाउसिंग स्कीम
फरीदाबाद। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, फिल्म इंडस्ट्री के शोमैन, भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य और बड़ी राजनीतिक हस्तियों की पसंद रहा कांत एंक्लेव अपने वजूद में आने के साथ ही विवादों में घिर गया था। दो दशक पहले यहां जमीन की कीमत 60 हजार रुपये वर्गगज थी, विवाद में घिरने के बाद यह कीमत 15 हजार रुपये वर्गगज तक कम हो गई। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद इस जमीन को कोई नहीं पूछ रहा।
हुडा के डीटीपी सतवीर मान ने बताया कि आर कांत बिल्डर्स को 1984 में अरावली पहाड़ी क्षेत्र में दिल्ली बॉर्डर स्थित अनंगपुर में 424.82 एकड़ में ग्रुप हाउसिंग का लाइसेंस दिया था। उस समय जमीन की चकबंदी नहीं हुई थी। बिल्डर ने कांत एंक्लेव के नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया था। पर्यावरण प्रेमी सुभाष शर्मा बताते हैं कि प्रोजेक्ट के खिलाफ अनंगपुर गांव के कुछ लोग कोर्ट चले गए थे। इन लोगों का आरोप था कि शामलात की गैरमुमकिन (कृषि के अयोग्य) जमीन पर उन लोगों का हक है इसलिए निर्माण नहीं किया जा सकता। जिला न्यायालय से बिल्डर को राहत मिल गई थी लेकिन कुछ लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर दी। इस दौरान बिल्डर ने रोड नेटवर्क तैयार कर 1000, 500, 250 और 160 गज के 33 प्लॉट तैयार कर देश की बड़ी हस्तियों को यह प्लॉट बेचे। अपील की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने 2002-03 में जिला प्रशासन को आदेश जारी किए कि अरावली संरक्षित एरिया में कोई रजिस्ट्री नहीं की जाएगी और न ही नक्शा पास किया जाएगा। प्रतिबंध के कारण कांत एंक्लेव में अन्य फ्लैटों का निर्माण और खरीद फरोख्त बंद हो गए। सुभाष शर्मा ने अरावली वन क्षेत्र में निर्माण रोकने के लिए 2004 में सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली थी। वह कहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आने से अब संरक्षित वन क्षेत्र में अब जमीन की खरीद फरोख्त पर रोक लगेगी क्योंकि कोई भी विवादित जमीन के लिए अपने जीवनभर की कमाई दांव पर नहीं लगाएगा।