फरीदाबाद नगर निगम चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों में सरगर्मियां बढ़ गई हैं। मोदी लहर के बीच पहली बार अपने दम पर राज्य की सत्ता पर काबिज हुई भाजपा में टिकट के दावेदारों ने ताल ठोकनी शुरू कर दी है।
एक वार्ड में चार से छह दावेदार बताए जा रहे हैं। टिकट बंटवारे की खींचतान शुरू होते ही संगठन को सर्वोपरी बताने वाली यह पार्टी भी गुटों में बंटती नजर आ रही है। गुटबाजी की शुरुआत एनआईटी विधानसभा क्षेत्र से हो चुकी है। माना जा रहा है कि निगम चुनाव से पहले ही जिला भाजपा में टिकट वितरण के लिए दिलचस्प त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है।
फरीदाबाद नगर निगम के चुनाव की घोषणा के बाद शुक्रवार को भाजपा के पूर्व प्रत्याशी यशवीर डागर, जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा और प्रदेश प्रवक्ता राजीव जेटली ने आननफानन में प्रेस कांफ्रेंस कर इनेलो विधायक को भाजपा की टिकट वितरण प्रणाली से दूर रहने के संकेत दे दिए।
अचानक दिए गए इस संदेश के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। मसलन, 19 विधायकों वाली इनेलो प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल है। जिले के इकलौते इनेलो विधायक नगेंद्र भड़ाना केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के करीबी माने जाते हैं।
इनेलो विधायक सालभर पहले ही भगवा रंग में रंग गए थे। एनआईटी क्षेत्र में सीएम मनोहरलाल की विकास रैली कराकर इनेलो विधायक प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गए थे, जबकि इस रैली में इनेलो विधायक के भाई व भाभी ने भाजपा का दामन थामा था। इसके बाद राज्यसभा सदस्य के चुनाव में अपनी ही पार्टी को दगा देते हुए भाजपा समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को वोट देकर भड़ाना ने राजनीतिक हलके में हलचल मचा दी थी।
पार्टी लाइन से हटकर भाजपा की गोद में बैठे इनेलो विधायक नगर निगम चुनाव में अपने परिवार के सदस्यों के लिए कम से कम दो सीटों की दावेदारी भाजपा में पेश कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो इसको लेकर भाजपा में अंदरखाने मतभेद शुरू हो गए हैं।
वहीं, दूसरी ओर पांच महीने पहले मनोहर सरकार के मंत्रीमंडल में हुए बदलाव के बाद जिले में भाजपा के समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। सत्ता के तीन केंद्र (केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, राज्य में केबिनेट मंत्री विपुल गोयल और मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा) बनने से अब निगम चुनाव में टिकट बंटवारे के दौरान गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है। बताया जाता है कि टिकट के लिए उम्मीदवारों ने अपने राजनीतिक आकाओं के चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं।
इनेलो ने भी नहीं पूछा
दो नांव पर सवारी करना विधायक नगेंद्र भड़ाना को भारी पड़ सकता है। भाजपा में उनका विरोध शुरू हो गया है। वहीं, उनकी अपनी ही पार्टी ने अब तक अपने इकलौते विधायक से निगम चुनाव को लेकर कोई राय-मश्विरा नहीं किया है। विधायक भी अपनी पार्टी में किसी तरह की दिलचस्वी नहीं दिखा रहे हैं।
बयानबाजी मेरी समझ से परे
टिकट किसको देना है किसको नहीं देना है, यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। मेरे पास इतना समय नहीं कि मैं दूसरे के कार्यक्षेत्र में दखल देता फिरूं। अचानक प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर मेरे के खिलाफ भाजपा नेताओं की बयानबाजी मेरी समझ से परे है।-नगेंद्र भड़ाना, इनेलो विधायक