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भजनपुरा त्रासदीः ट्यूशन नहीं जाना चाहता था फरहान, मैंने जबरन भेजा....अब वो कभी नहीं आएगा

Sun, 26 Jan 2020 05:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा शुजात आलम, नई दिल्ली
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फरहान - फोटो : अमर उजाला
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मासूम फरहान के पिता आरिफ की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे। रोते-रोते बस यही कहे जा रहे थे कि उनका बच्चा आज ट्यूशन न जाने की जिद कर रहा था। मैंने रविवार को छुट्टी होने की बात कहकर उसे जबरन भेज दिया और वह हमेशा के लिए दुनिया छोड़कर चला गया।

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उधर, मासूम दीशू फौजी बनना चाहता था। परिजनों ने दो दिन पूर्व ही उसे फौजी की यूनिफॉर्म दिलवाई थी, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। हादसे में मासूम कृष्णा की तो मौत हुई ही, उसके भाई नितिन व बहन उमा जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उधर, कोचिंग संचालक उमेश के बड़े भाई हरिशंकर ने उसकी लाश देखी तो वह बेहोश हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

एक साथ चार बच्चों और उमेश की मौत से मोहल्ले में कोहराम मचा हुआ था। वहां हजारों लोगों की भीड़ जुटी थी। दीशू के पिता महिपाल ने बताया कि उनका बेटा 7वीं कक्षा में था। बुधवार को ही दीशू की दादी बट्टी की बीमारी से मौत हुई थी। घर में पहले से मातम का माहौल था। अब दीशू की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। 
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प्रोविजनल स्टोर चलाने वाले महिपाल के परिवार में पत्नी संगीता, बड़ा बेटा दीपक और बेटी मन्नत हैं। दूसरी ओर, फरहान पहली कक्षा में पढ़ता था। इसके परिवार में मां, एक भाई व बहन हैं। पिता टेलर का काम करता है। फरहान की मौत से परिवार का रोते-रोते बुरा हाल है। दूसरी ओर, कृष्णा के परिवार पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके पिता रमेश ने बताया कि उनके तीन बच्चे ट्यूशन पढ़ने जाते थे। 

इनमें कृष्णा के अलावा नितिन (13) और उमा (7) हैं। कृष्णा की मौत हो गई। नितिन व उमा बुरी तरह जख्मी हो गए। दोनों जीटीबी अस्पताल में भर्ती हैं। रमेश चांद बाग में फैक्टरी में काम करता है। रमेश के पड़ोस में रहने वाली मासूम आरती उर्फ शालू (10) भी जख्मी है। उधर, उमेश की मौत के बाद से उसकी पत्नी रुचि की हालत भी खराब है।
 

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दो दिन पहले भी गिरा था मलबा, उस समय गार्डर लगाकर रोक दी थी दीवार

लापरवाही की इमारत में दो पूर्व भी निर्माण स्थल से मलबा गिरा था। वहां काम कर रहे मजदूरों ने किसी तरह लोहे का गार्डर लगाकर दीवार को रोक लिया था। शनिवार को वही हिस्सा गिर गया और मकान की छत ढह गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते गिरने वाले हिस्से को ठीक कर लिया जाता तो इतना बड़ा हादसा न होता। 

पुलिस बिल्डिंग के मालिक व उमेश के बड़े भाई हरिशंकर से पूछताछ कर रही है। जानकारी के अनुसार, हरिशंकर और उमेश कई साल से अपने घर पर ही कोचिंग सेंटर चला रहे थे। ग्राउंड फ्लोर व ऊपरी मंजिलों पर इनका परिवार रहता भी है। यहां उमेश उसकी पत्नी रुचि, हरिशंकर उसकी पत्नी लक्ष्मी के अलावा बाहर के तीन शिक्षक सुजाता (23), सुमित और विकास पढ़ाते थे। मकान की पहली मंजिल पर हरिशंकर बड़ी क्लास के छात्रों को पढ़ाता है। दूसरी मंजिल पर उमेश छोटी कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाता था। इनके कोचिंग सेंटर में छात्रों की संख्या बढ़ रही थी।

सीएम के सुरक्षाकर्मियों से झड़प, खुदी सड़क...जलभराव होने से लोगों में आक्रोश

हादसे से लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। उनका कहना है कि खुदी और दलदल समान सड़क से मोहल्ले वाले बच्चों को कंधे पर लादकर एंबुलेंस तक ले गए। क्योंकि, सुभाष मोहल्ले के गली नंबर-6 में किसी भी गाड़ी का जाना नामुमकिन है। दो महीने से सड़क खुदी हुई है। हर ओर पानी भरे होने से सीएम अरविंद केजरीवाल को भी एक किलोमीटर पैदल ही जाना पड़ा। 

लोगों का कहना है कि खस्ताहाल सड़क की कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यदि सड़क ठीक होती तो बचाव दल समय से पहुंच सकता था और बच्चों को मलबे के नीचे से जल्दी निकाला जा सकता था। इस दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। सीएम की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मियों से भी धक्का-मुक्की की।

ये हुए घायल...
सुजाता तिवारी (23), सौरभ (9), नितिन (13), हर्ष (7) उमा (7), आरती (9), सिदरा परवीन (9), बुशरा परवीन (4), स्वाति (9)
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