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Delhi NCR News: याददाश्त की भूल समझ कर टाल रहे परिवार, देर से पहचान पड़ रही भारी

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विश्व अल्जाइमर दिवस
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-जागरूकता की कमी, सामाजिक झिझक और लक्षणों को सामान्य व्यवहार से जोड़ना सबसे बड़ी गलतफहमी



चिराग गुप्ता

पूर्वी दिल्ली। किसी व्यक्ति का बार-बार एक ही सवाल पूछना, सामान रखकर भूल जाना या परिचित रास्तों को पहचानने में परेशानी होना अक्सर परिवार सामान्य व्यवहार मानकर नजरअंदाज कर देता है। यही लापरवाही कई मामलों में अल्जाइमर की समय पर पहचान में देरी का कारण बन रही है। विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर इहबास (इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज) के डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। देरी होने पर बीमारी अधिक गंभीर अवस्था में पहुंच सकती है। पूर्वी दिल्ली में किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि बड़ी संख्या में मरीजों में लक्षण शुरू होने के करीब दो साल या उससे अधिक समय बाद बीमारी की पहचान हो पाती है।



इहबास के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि अल्जाइमर केवल भूलने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क से जुड़ा एक प्रगतिशील रोग है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और दैनिक कार्यों को प्रभावित करता है। शुरुआती संकेत सामान्य दिखाई देने के कारण परिवार अक्सर इन्हें उम्र बढ़ने या सामान्य व्यवहार का हिस्सा मान लेते हैं।
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उन्होंने बताया कि शुरुआती लक्षणों में हाल की बातों को बार-बार भूलना, एक ही सवाल दोहराना, परिचित रास्तों या स्थानों को लेकर भ्रम होना, रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई, सही शब्द खोजने में परेशानी, निर्णय लेने की क्षमता में कमी और व्यवहार या स्वभाव में बदलाव शामिल हो सकते हैं। कुछ मरीज सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाने लगते हैं या पहले की तुलना में अधिक चिड़चिड़े दिखाई देते हैं।



समय पर पहचान जरूरी



डॉ. ओमप्रकाश के अनुसार, बीमारी की जल्द पहचान और उपचार से मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। समय पर पहचान होने से परिवार को देखभाल, उपचार और भविष्य की जरूरतों की बेहतर तैयारी का अवसर भी मिलता है। वहीं, देर से अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में याददाश्त और मानसिक क्षमताओं में अधिक गिरावट हो सकती है, जिससे देखभाल की चुनौतियां बढ़ जाती हैं।
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डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता की कमी, सामाजिक झिझक और शुरुआती लक्षणों को सामान्य व्यवहार समझना उपचार में देरी की प्रमुख वजहें हैं। यदि किसी व्यक्ति में लगातार भूलने, रास्ता पहचानने में परेशानी, बातचीत में कठिनाई या व्यवहार में असामान्य बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेकर समय पर जांच कराना बीमारी की पहचान और बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
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