-दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट, दिल्ली पुलिस और हरियाणा के एफडीए ने रैकेट का किया पर्दाफाश
-भारी मात्रा में नकली दवाएं, स्टेरॉयड, रॉ-मटेरियल और उपकरण किए जब्त
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के नरेला में एक रिहायशी अपार्टमेंट में नकली दवाओं और स्टेरॉयड बनाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस, दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल विभाग और हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने दो दिन के संयुक्त अभियान में यह कार्रवाई की। इस दौरान भारी मात्रा में नकली दवाएं, स्टेरॉयड, रासायनिक कच्चा माल और उत्पादन उपकरण जब्त किए गए।
यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी। अभियान के पहले दिन बिना लाइसेंस के चल रहे उत्पादन और पैकेजिंग सेटअप का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने मौके से सीलिंग मशीनें, हाथ से चलने वाले सील क्रिम्पिंग उपकरण, हीट गन और वजन करने वाली मशीनें बरामद कीं। टीम को बिना लेबल वाली गोलियां और एनाबॉलिक स्टेरॉयड की तरल शीशियां भी मिलीं। अपार्टमेंट एलोपैथिक दवाओं के स्टॉक और पैकेजिंग के लिए किराए पर लिया गया था। इसका संबंध सोनीपत की एक उत्पादन इकाई से बताया गया। जांच टीम के सामने कोई वैध दवा लाइसेंस या खरीद रिकॉर्ड पेश नहीं किया जा सका। दूसरे दिन कॉम्प्लेक्स की कई मंजिलों से अतिरिक्त खेप बरामद की गई। ये इलेक्ट्रिक यूटिलिटी शाफ्टों के अंदर छिपाकर रखी गई थीं।
जब्त सामग्री का विस्तृत विवरण
स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह के अनुसार, बरामद सामग्री में बड़ी मात्रा में स्टेरॉयड हार्मोन पाउडर शामिल हैं। इनमें प्रोजेस्टेरोन, ऑक्सैंड्रोलोन, मेस्टेरोलोन और ट्रेंबोलोन एनंथेट जैसे स्टेरॉयड शामिल हैं। जर्मनी में निर्मित 'टेस्ट-सी' और 'डेका-400' लेबल वाले 1500 से अधिक तैयार स्टेरॉयड इंजेक्शन वायल भी मिले। पांच हजार से अधिक अलग-अलग रंग की गोलियां और पांच हजार से ज्यादा खाली कांच के वायल भी जब्त किए गए। लगभग 2500 बाहरी पैकेजिंग बॉक्स और हजारों फ्लिप-ऑफ कैप भी बरामद हुए।
सिंह ने कहा कि जब्त स्टॉक ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कार्रवाई की गई है। लैब जांच के लिए कानूनी सैंपल एकत्र किए गए हैं। शुरुआती जांच में बिना वैध लाइसेंस के दवाओं के गैर-कानूनी निर्माण और वितरण का उल्लंघन सामने आया है। कहा कि दिल्ली सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि नकली दवाएं जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं और इनके निर्माताओं पर सख्त कार्रवाई होगी।