दिल्ली में इलाज कराने वाले मरीज हो जाएं सावधान, ऐसे हो रहा जिंदगी से खिलवाड़
Wed, 04 Oct 2017 03:38 PM IST
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली
सार
राजधानी के स्वास्थ्य सिस्टम को लेकर बड़ा खुलासा
दिल्ली में घनी आबादी को टारगेट बना रहे हैं झोलाछाप डॉक्टर
राजधानी के स्वास्थ्य सिस्टम को लेकर बड़ा खुलासा
गलियों में क्लिनिक खोल खुद को एमडी लिखते हैं झोलाछाप
डेंगू, मलेरिया के नाम पर मरीजों से लूट
यूं तो चिकित्सीय जगत में हर दिन देश की राजधानी दिल्ली नया मुकाम हासिल करती जा रही है, लेकिन इसी शहर में बीमारियों के नाम पर बड़ी लूट भी चल रही है। दिल्ली के घनी आबादी को टारगेट करते हुए झोलाछाप डॉक्टरों का रैकेट बढ़ता ही जा रहा है। दक्षिण से लेकर पूर्वी दिल्ली तक इन झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या एक बार फिर से बढने लगी है।
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जानकारों की मानें तो डेंगू और मलेरिया का खौफ दिखाकर ये डॉक्टर मरीजों से जमकर वसूली कर रहे हैं। गलियों में क्लिनिक खोले बैठे झोलाछाप खुद को एमबीबीएस-एमडी डिग्रीधारी डॉक्टर बता रहे हैं। जनवरी से सितंबर माह में 42 झोलाछाप डॉक्टरों को पकड़ा गया है।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) की एंटी क्वैकरी टीम के एक सदस्य ने बताया कि करीब सात वर्ष पहले दिल्ली में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया था। 200 से झोलाछाप को इस दौरान मेडिकल प्रैक्टिस करते हुए पकड़ा था। हालांकि इसके बाद झोलाछाप की संख्याओं में कमी आई है, लेकिन कुछ समय पहले से फिर इनका दायरा बढ़ता ही जा रहा है।
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टेस्ट लैब से सेटिंग, प्रति मरीज कमीशन भी सेट
- फोटो : डेमो
पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में इनदिनों डेंगू और मलेरिया को लेकर मरीजों को खुलेआम लूटा जा रहा है। एक ओर दिल्ली सरकार ने मच्छर जनित बीमारियों की जांच सरकारी अस्पतालों में निशुल्क की हुई है। वहीं, प्राइवेट लैबोरेटरी में मरीजों से 500 रुपये तक जांच के नाम पर लिए जा रहे हैं।
यहां बैठे टेक्रीशियन बताते हैं कि डॉक्टर की सेटिंग की वजह से रेट ज्यादा रहता है। प्रति मरीज डॉक्टर का कमीशन सेट है। सीबीसी और विडाल टेस्ट कराने पर मरीज को 550 रुपये देने पड़ रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में ये दोनों टेस्ट फ्री हैं। वहीं, कुछ लैब में इनकी कीमत 300 रुपये तक है।
काली और लाल गोलियों से चला रहे काम
ज्यादात्तर क्लिनिक में आज कल काली, लाल और सफेद गोलियां देखने को मिल रही हैं। गौर करने वाली बात यह है कि प्रति मरीज ये डॉक्टर 300 से 400 रुपये लेते हैं, लेकिन मरीज को न कोई बिल दिया जाता है और न ही कोई प्रिस्क्रिपशन।
आलम यह है कि मरीजों को बुखार, पेट दर्द, सीने में दर्द, चक्कर और उल्टी की शिकायत पर इन्हीं रंग बिरंगी गोलियों में से ही सेवन के लिए देते हैं। इन दवाओं पर न कोई पैकिंग होती है न कोई नाम। दवा एक्सपायर है या नहीं। ये भी मरीज को नहीं पता होता।
डीएमसी की एक रिपोर्ट भी दिल्ली में झोलाछाप डॉक्टरों के रैकेट को बता रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से लेकर सितंबर तक के बीच दिल्ली में 42 झोलाछाप डॉक्टरों को पकड़ा है। इनमें से किसी के पास डिग्री फर्जी है तो कोई बगैर डिग्री के ही एप्रैन पहनकर मरीजों का इलाज कर रहा है। कुछ बंगाली क्लिनिक नाम से हैं तो कुछ पॉलीक्लिनिक के नाम से फर्जीवाड़ा कर रहे हैं।
कब कितने झोलाछाप पकड़े
वर्ष झोलाछाप पकड़े
2016 154
2015 25
2014 162
2013 55
2012 241
2011 137
2010 125
मरीजों को मांगनी चाहिए डिटेल
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) का नियम है कि डॉक्टर दवा दे सकता है। काली, पीली और सफेद गोलियां सस्ती होने की वजह से मरीजों को देते हैं। हालांकि इसमें नुकसान मरीज का है। अगर कोई गोली दुष्प्रभाव करती है तो मरीज के पास उसकी शिकायत करने का कोई सबूत नहीं होता है। इसलिए मरीज को प्रिस्क्रिप्शन लेना चाहिए और उस पर दवाएं भी लिखवानी चाहिए। -डॉ. गिरीश त्यागी, रजिस्ट्रार, डीएमसी