असली कंपनी से मंगाया जाता था कच्चा माल
पुलिस की मानें तो यह बड़ा रैकेट है और इसमें काफी लोग शामिल हैं। नकली सिगरेट की नोएडा के अलावा अन्य जगहों परे भी फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं। नकली कंपनी चलाने वालों ने असली कंपनी के लोगों से सांठगांठ कर रखी थी, ताकि वहां से असली रेपर और अन्य पैकिंग समेत सामान को मंगाकर नकली सिगरेट बनाई जा सके। जिन मशीनों से पैकिंग की जाती है वह भी असली कंपनी में चलने वाली ही ब्रांड की मशीनें हैं।
गांजा डालकर बनाई जाती थी सिगरेट
तंबाकू में गांजा मिलाकर नकली सिगरेट तैयार की जाती थी। एक बार जो व्यक्ति नकली सिगरेट का सेवन कर लेता था तो वह उसी स्टॉल से सिगरेट खरीदता था। कई बार लोग एक-दो नहीं, बल्कि कई-कई बंडल तक खरीदकर ले जाते थे। विशेषकर छात्रों को इसे बेचा जाता था।