एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस के जवान कोरोना योद्धा बनकर दिल्ली के लोगों के लिए लड़ रहे हैं वहीं सिल्वर व गोल्ड अवार्डों को लेकर दिल्ली पुलिस के थानों में गुटबाजी शुरू हो गई है। इन अवार्ड के लिए काफी थानों के थानाध्यक्षों ने अपना व अपने चहेतों का नाम भेजा है।
ऐसे में थाने में बढ़िया काम करने वाले पुलिसकर्मी अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। ऐसे लोग अवार्ड के लिए जान-पहचान लगाकर अपने नामों को आगे भिजवा रहे हैं। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अवार्ड देने में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और बढ़िया काम करने वाले पुलिसकर्मियों को ही अवार्ड दिए जाएंगे।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अन्य अर्धसैनिक बलों और पुलिस संगठनों की तर्ज पर दिल्ली पुलिस ने भी अपने पुलिस अधिकारियों व पुलिसकर्मियों को उनके उत्कृष्ट, सराहनीय एवं साहसिक कार्यों के लिए वर्ष 2020 से सिल्वर डिस्क अवार्ड और गोल्डन डिस्क अवार्ड देने की घोषणा की है।
हर वर्ष गणतंत्र दिवस व स्वंत्रतता दिवस पर सीमित पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को ही अवार्ड दिए जाते हैं। ऐसे में दिल्ली पुलिस में साहसिक कार्य करने वाले पुलिसकर्मी रह जाते हैं। इस कारण ये अवार्ड शुरू किए गए हैं। पहले ये अवार्ड गृहमंत्रालय द्वारा दिए जाते थे, मगर अब अवार्ड देने की शक्तियां दिल्ली पुलिस आयुक्त को दे दी गई हैं। 50 पुलिस अधिकारी व कर्मियों को सिल्वर कमेंडेशन डिस्क व 25 को गोल्उ कमेंडेशन डिस्क अवार्ड दिए जाएंगे।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने हर जिला डीसीपी से अवार्ड के योग्य पुलिसकर्मियों के नाम मांगे हैं। जिला डीसीपी ने थानाध्यक्षों से नाम मांगे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कई थानों के थानाध्यक्ष साहसिक व अच्छा काम करने वालों का नाम भेजने की बजाय अपना व अपने चहेतों का नाम भेज रहे हैं।
दक्षिणी परिक्षेत्र के एक इंस्पेक्टर ने बताया कि थानाध्यक्ष पारदर्शिता नहीं अपना रहे हैं। ऐसे में थाने में गुटबंदी बढ़ रही है। ऐसे में जिन लोगों ने अच्छा काम किया और उसके थानाध्यक्ष ने उनका नाम अवार्ड के लिए नहीं भेजा है वो पुलिसकर्मी जिला डीसीपी ऑफिस में जान-पहचान निकलवा कर अपना नाम आगे बढ़ रहा है। कई थानों में तैनात इंस्पेक्टरों ने भी यहीं बात कही। ऐसे में काफी पुलिसकर्मियों में रोष है।