-कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट को लेकर मेडिकल संस्थाओं की चेतावनी, मरीजों की सुरक्षा पर जताई चिंता
-विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, बिना योग्य और प्रशिक्षित डॉक्टरों से हेयर, त्वचा ट्रांसप्लांट कराने से गंभीर संक्रमण, आंखों की रोशनी जाने जैसी हो सकती है समस्या
सिमरन
नई दिल्ली।
सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हेयर ट्रांसप्लांट व अन्य कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट के आकर्षक विज्ञापन लोगों को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि मेडिकल विशेषज्ञों ने ऐसे उपचारों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि बिना योग्य और प्रशिक्षित डॉक्टरों से हेयर या स्किन ट्रीटमेंट कराने से गंभीर संक्रमण, आंखों की रोशनी जाने जैसी जटिल समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कुछ मामलों में मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है।
देश की प्रमुख मेडिकल संस्थाओं ने भी कॉस्मेटिक उपचारों को लेकर मरीजों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (आईएडीवीएल) और एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (एपीएसआई) के विशेषज्ञों का कहना है कि हेयर ट्रांसप्लांट और इसी तरह की प्रक्रियाएं केवल प्रशिक्षित और पंजीकृत मेडिकल विशेषज्ञों द्वारा ही की जानी चाहिए। आईएडीवीएल के अध्यक्ष डॉ. विनय सिंह ने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रियाएं देखने में भले ही सामान्य लगती हों, लेकिन यह एक जटिल मेडिकल प्रक्रिया है। एक डर्मेटोलॉजिस्ट बनने के लिए डॉक्टर को एमबीबीएस के बाद तीन साल की पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग और रेजिडेंसी पूरी करनी पड़ती है। इस दौरान त्वचा और बालों से जुड़ी बीमारियों तथा उनके उन्नत उपचारों का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना पर्याप्त योग्यता वाले लोगों द्वारा ऐसे उपचार किए जाने से मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।
हेयर ट्रांसप्लांट कराने में चली गई हैं जान
वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉ. आदित्य अग्रवाल ने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट एक आधुनिक और जटिल मेडिकल प्रक्रिया है। इसे करने के लिए त्वचा की बनावट, बालों से जुड़ी बीमारियों, संक्रमण नियंत्रण और संभावित जटिलताओं को संभालने की गहरी समझ जरूरी होती है। इसलिए यह प्रक्रिया केवल पंजीकृत और प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञों द्वारा ही की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बिना पर्याप्त योग्यता वाले लोगों ने कॉस्मेटिक या हेयर ट्रांसप्लांट जैसे उपचार किए और मरीजों को गंभीर नुकसान हुआ। कानपुर में हुए एक चर्चित मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दो इंजीनियरों की मौत हो गई थी।
मजबूत कानूनी बनाने की जरूरत
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. दीपिका पांधी ने बताया कि मेडिकल सेवाओं के विज्ञापन और मार्केटिंग को नियंत्रित करने के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था की जरूरत है। इससे फर्जी डॉक्टरों और भ्रामक प्रचार पर रोक लगाई जा सकेगी।