दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रविवार को स्वाइन फ्लू की संदिग्ध मरीज सीमा सक्सेना ने दम तोड़ दिया। सेक्टर-24 स्थित ईएसआई अस्पताल ने गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल भेज दिया था। वहां भी आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) न होने का हवाला देते हुए उन्हें उच्च अस्पताल रेफर कर दिया। परिजनों के मुताबिक वक्त पर यदि महिला को इलाज मिल जाता तो उसकी जान शायद बच जाती।
रेफर करने और बाद मरीज की मौत होने का यह पहला मामला नहीं है। जिला अस्पताल से रोजाना औसतन पांच से छह गंभीर रोगी रेफर कर दिए जाते हैं। ईएसआई अस्पताल में भी ऐसे ही हालात हैं लेकिन करार होने के कारण ईएसआई ज्यादातर मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर कर देता है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार करोड़ों का बजट पास करती है लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों पर नजर डाली जाए तो सिर्फ भव्य बिल्डिंग ही नजर आती है। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में आईसीयू और सीसीयू (क्रिटिकल केयर यूनिट) को छोड़िए गंभीर बच्चों के इलाज के लिए एनआईसीयू तक नहीं है। दिल के रोगियों के लिए ईसीजी के अलावा और कोई सुविधा यहां नहीं है।
सेक्टर-24 स्थित ईएसआई अस्पताल का भी बुरा हाल है। 300 बेड के इस अस्पताल में किसी भी प्रकार की क्रिटिकल केयर की सुविधा नहीं है। सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई और ग्रेटर नोएडा मेडिकल यूनिवर्सिटी में आईसीयू, सीसीयू, आईसीसीयू (इंटेंसिव कार्डिएक केयर यूनिट) और बच्चों के लिए एनआईसीयू (निओनेटल इंटेसिव केयर यूनिट) का प्रस्ताव है लेकिन प्रदेश सरकार में फाइल अटके होने के कारण यहां अभी तक मरीजों को भर्ती करने तक की सुविधा शुरू नहीं हुई है। ऐसे में गंभीर रोगियों को दिल्ली के सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां पहले से ही भीड़ है।