अल्ताफ के मुताबिक 42वीं मंजिल की रेलिंग के बाहर लटके सॉफ्टवेयर इंजीनियर संभव जैन बेहद तनाव में थे। बचाने की कोशिश कर रहे कर्मचारियों से उन्होंने यहां तक कह दिया था कि उन्हें छोड़ दें, वरना वह उन्हें भी साथ लेकर कूद जाएंगे।
नोएडा के सेक्टर-94 स्थित सुपरनोवा की एस्पायरा बिल्डिंग में हुए हादसे को लेकर एसी तकनीशियन अल्ताफ ने आंखों देखा हाल बयां किया। उनके मुताबिक 42वीं मंजिल की रेलिंग के बाहर लटके सॉफ्टवेयर इंजीनियर संभव जैन बेहद तनाव में थे। बचाने की कोशिश कर रहे कर्मचारियों से उन्होंने यहां तक कह दिया था कि उन्हें छोड़ दें, वरना वह उन्हें भी साथ लेकर कूद जाएंगे।
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अल्ताफ ने बताया कि जब तीन सहकर्मियों संग उन्होंने संभव को बालकनी की रेलिंग के बाहर लटका देखा तो तुरंत उन्हें समझाने और ऊपर खींचने का प्रयास शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने उन्हें सुरक्षित अंदर आने के लिए लगातार अपील की। हालांकि स्थिति तब और गंभीर हो गई जब संभव ने उन्हें पीछे हटने का इशारा करते हुए कहा, मुझे छोड़ दो, नहीं तो तुम्हें भी लेकर कूद जाऊंगा। चेतावनी सुन चारों कर्मी एक पल के लिए पीछे हट गए। ठीक उसी समय संभव ने बालकनी से छलांग लगा दी। हादसे के बाद मायूस दिख रहे अल्ताफ ने अफसोस जताया कि चार लोग मिलकर भी जान नहीं बचा पाए।
मैं जीना नहीं चाहता, इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं
नोएडा। पुलिस को संभव जैन के मोबाइल फोन की जांच में पिता के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत मिली है। इसमें संभव ने आत्महत्या का जिक्र करते हुए लिखा था कि वह जीना नहीं चाहते। उन्होंने इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं बताया। पुलिस के मुताबिक यह बातचीत घटना से पहले की है। पुलिस चैट के समय और परिस्थितियों की भी जांच कर रही है। घटना के बाद इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। एक वीडियो में चार लोग संभव को बचाने और ऊपर खींचने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, बिल्डिंग के नीचे मौजूद कई लोग घटना का वीडियो बनाते नजर आए। पुलिस इन वीडियो की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो से घटना के क्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
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पुलिस बोली- चार लोगों ने बचाने के लिए झोंकी पूरी ताकत
पुलिस के मुताबिक शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे एसी रिपेयरिंग का काम कर रहे कर्मचारियों की नजर बालकनी की तरफ गई। उन्होंने संभव को रेलिंग के बाहर लटका देखा। उसकी स्थिति देखकर कर्मचारियों ने उसे समझाना शुरू किया। उन्होंने नीचे नहीं कूदने और वापस अंदर आने के लिए कहा। उस समय वहां मौजूद लोगों ने उसे पकड़कर ऊपर खींचने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक संभव को बचाने के लिए चार लोगों ने प्रयास किया। चारों ने उन्हें पकड़ लिया और ऊपर खींचने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान संभव देर तक रेलिंग के बाहर लटके रहे। बचाने वाले लोग लगातार समझाते रहे। पुलिस के मुताबिक इसी दौरान संभव ने वहां मौजूद लोगों से बातचीत भी की। संभव ने बताया कि वह और जीना नहीं चाहते। लोगों ने भरोसा दिलाने और वापस ऊपर खींचने का प्रयास जारी रखा। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि उन्हें सुरक्षित अंदर खींच लिया जाएगा।
साढ़े तीन साल पहले हुई थी शादी, बेटे संग अलग रहती है पत्नी
संभव मानेसर के सेक्टर-1 स्थित सोसाइटी में परिवार के साथ रहते थे। सोसाइटी के एक निवासी ने बताया कि संभव का परिवार बीते 4-5 साल से यहां रह रहा है। पिता विनय कुमार जैन भी निजी कंपनी में काम करते हैं। परिवार में संभव के माता-पिता के अलावा बहन भी हैं। संभव की शादी लगभग साढ़े 3 साल पहले हुई थी। पत्नी अपने छह महीने के बेटे के साथ अलग रहती है। सोसाइटी निवासियों ने बताया िक पत्नी से विवाद को लेकर वह परेशान थे। वहीं पुलिस की जांच में उसके पारिवारिक और आर्थिक जीवन से जुड़े पहलू सामने आ रहे हैं। शादी के बाद पत्नी को समय से पहले संतान हुई थी। बच्चे और पत्नी के इलाज में करीब 35 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद दंपती के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया था और तलाक की प्रक्रिया चलने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि संभव बृहस्पतिवार को गुरुग्राम स्थित घर से निकले थे।