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रिकॉर्ड तोड़ ठंड दे सकती है जानलेवा हाइपोथर्मिया रोग, दिल्ली में हर साल होती है कइयों की मौत

Sat, 28 Dec 2019 11:08 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाइपोथर्मिया रोग - फोटो : Social Media
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दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी जानलेवा हाइपोथर्मिया रोग को बढ़ावा दे सकती है। डॉक्टरों की सलाह है कि हाइपोथर्मिया रोग के प्रति सतर्कता बरतने में ही भलाई है। इसी साल 1 से 6 जनवरी के बीच दिल्ली में 44 लोगों की मौत हुई थी। इन मौतों में से कुछ के लिए डॉक्टर हाइपोथर्मिया को वजह मानते हैं। 

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हाइपोथर्मिया को आमतौर पर शरीर के 95 डिग्री फारेनहाइट या उससे कम तापमान के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह तब होती है जब बाहर का वातावरण बहुत ठंडा होता है या शरीर में ताप उत्पादन क्षमता कम हो जाती है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल का कहना है कि सर्दियों के मौसम में लोग हाइपोथर्मिया से मर सकते हैं। उस स्थिति की कल्पना करें, जब आप सुबह-सुबह सड़क किनारे ऐसे लोगों को देखते हैं जिन्होंने पर्याप्त वस्त्र नहीं पहने होते हैं। उनमें से कुछ कांप रहे होते हैं और कुछ नहीं। जो कंपकंपाता है, वह बताता है कि उसका शरीर बाहर के कम तापमान की स्थिति में शरीर के मूल तापमान को बनाये रखने की कोशिश कर रहा है। दूसरा, जिसके शरीर में कंपकंपी नहीं हो रही है, वह मर सकता है, या सामान्य हो सकता है। 
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कालरा अस्पताल के निदेशक डॉ. आरएन कालरा के अनुसार आमतौर पर प्राकृतिक चिकित्सा में एक कहावत प्रचलित है कि सिर थंडा, पेट नरम और पांव गरम। यदि पैर के तलवे और पैर ठंडे हैं और व्यक्ति कांप नहीं रहा है, तो यह एक चिकित्सा आपातकाल स्थिति है। इसके विपरीत यदि व्यक्ति कांप नहीं रहा है और पैर गर्म हैं, तो यह चिकित्सीय आपातकाल नहीं है। 

एक व्यक्ति हाइपोथर्मिया से पीड़ित हो सकता है। यदि वह ठंडे तापमान के संपर्क में आ गया है तो धीमी या लड़खड़ाती आवाज, नींद या भ्रम की दशा, हाथ और पैर में कंपकंपी या कड़ापन, शरीर की गति पर कमजोर नियंत्रण, धीमी प्रतिक्रिया या कमजोर होती नाड़ी इत्यादि लक्षण देखने को मिल सकते हैं। 

बच्चों के साथ पहाड़ पर जाने से करें परहेज

इस मौसम में शिशु को लेकर पहाड़ों पर घूमने जाने से फिलहाल परहेज करें। आरएमएल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार का कहना है कि दिल्ली में लगातार गिर रहा तापमान नौनिहालों और बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। प्रीमेच्योर शिशुओं को भी इस सर्दी में खास सतर्कता की आवश्यकता है। ज्यादा ठंड होने से इन बच्चों का रक्तसंचार तक प्रभावित होता है। साथ ही शरीर भी नीला पड़ने लगता है। इसलिए शिशुओं को जहां तक संभव हो सके बाहरी हवा से बचाकर रखें। सुनिश्चित करें कि आपका घर पर्याप्त गर्म रहे। थर्मोस्टेट को कम से कम 68 से 70 डिग्री पर रखें। 

 
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ऐसे कर सकते हैं बचाव

60 से 65 डिग्री तक तापमान वाले हल्के ठंडे घरों में वृद्ध लोगों में हाइपोथर्मिया हो सकता है। घर पर शरीर को गर्म रखने के लिए, मोजे और चप्पलों के साथ, अपने कपड़ों के नीचे लंबे अंडरवियर पहनें। गर्म हवा की परत बनाये रखने के लिए गर्म ढीले कपड़ों की कई लेयर पहनें। मंकी कैप का चलन है। अपने पैरों और कंधों को गर्म रखने के लिए कंबल का प्रयोग करें और एक टोप या टोपी पहनें। जांच करें कि क्या आपके द्वारा सेवन की जाने वाली कोई भी दवा या ओवर-द-काउंटर दवाएं हाइपोथर्मिया के लिए आपके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। ध्यान रखें कि बिना कंपकंपी के हाइपोथर्मिया एक बुरा संकेत है।
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