विसरा या फिर मृतक के कपड़े आदि रखने के लिए थानों में कोई ऐसी उपयुक्त व्यवस्था नहीं है। इसके चलते पुलिस विसरा को जल्द से जल्द विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजने का दावा कर रही है लेकिन मृतकों के खून आदि से सने कपड़ों को मालखाने में दुर्गंध आने की समस्या बता रही है।
पेड़ पर टंगे दिखे थे खून से सने कपड़े व अन्य सामान
एक साल पहले बीटा-2 थाने में पेड़ पर किसी मृतक के कपड़े आदि पॉलिथीन में टंगे दिखाई दिए थे। इसके बाद चर्चा हुई थी कि पुलिस ने विसरा पेड़ पर टांगे हुए हैं। पुलिस ने विसरा पेड़ पर टंगे होने से इंकार करते हुए हवाला दिया था कि खून से सने कपड़ों की दुर्गंध कम करने के लिए उन्हें धूप में टांगा गया था। लेकिन वास्तव में यह समस्या हर थाने की है। रक्त, विसरा आदि अगर मालखाने में कुछ घंटे रखा जाता है तो दुर्गंध आने लगती है।
गाजियाबाद में प्रयोगशाला बनने से भी पूरी तरह राहत नहीं
पहले विसरा आदि जांच के लिए आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जाते थे। वहां से रिपोर्ट आने में एक साल से भी अधिक समय लगता था। गाजियाबाद विधि विज्ञान प्रयोगशाला बनने के बाद विसरा वहीं जांच के लिए भेजे जाते हैं। इससे रिपोर्ट आने के समय में कुछ कमी तो आई है लेकिन आज भी कई विसरा रिपोर्ट आने में छह माह से अधिक का समय लग जाता है।
मृतक के सामान आदि रखने के लिए उपयुक्त व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी थानों में इस तरह के सामान रखने के लिए स्टोर बनाने की तैयारी चल रही है। ये थाने के कार्यालय से कुछ दूरी पर बनाया जाएगा। विसरा रिपोर्ट आने में विधि विज्ञान प्रयोगशाला से देरी होती है।- रणविजय सिंह, एसपी देहात