दिल्ली में चुनाव से पहले केंद्र की भाजपा सरकार पार्टी की राज्य इकाई को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश कर रही है।
भले ही पार्टी ने यह कह दिया है कि इस बार दिल्ली का चुनाव चेहरे पर नहीं विचाराधारा पर लड़ा जाएगा लेकिन राजनीतिक गलियारों में दिल्ली में के नए मुख्यमंत्री के नामों की चर्चा शुरु हो गई है। माना यह भी जाना जा रहा है कि केंद्र सरकार की कैबिनेट में होने वाले बदलाव का भी इस चुनाव से गहरा ताल्लुक है।
भाजपा असल में एक ऐसे चेहरे को कैबिनेट से छुट्टी दे सकती है जिसे वह दिल्ली में स्पष्ट बहुमत मिलने की स्थिती में सीएम बनाना चाहती है। आइए जानते हैं कौन है वह चेहरे जो बीजेपी की ओर से दिल्ली सीएम की दौड़ में सबसे आगे हैं।
मीनाक्षी लेखी
मीनाक्षी लेखी: दिल्ली के लिए यह कोई नया नाम नहीं है। एक रसूखदार पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखने वाली मीनाक्षी लेखी असल में पार्टी की प्रवक्ता भी रही हैं और गाहे-बगाहे उन्हें मीडिया में देखा जाता रहा है।
हालांकि एक बात जो उनके सीएम बनने के पक्ष में नहीं लगती वह यह है कि मीनाक्षी लेखी को कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है।
बता दें कि मई में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा को दिल्ली में काफी फायदा पहुंचाया था। वह फिलहाल दिल्ली से ही भाजपा सांसद भी हैं।
सतीश उपाध्याय:
सतीश उपाध्याय: दिल्ली में फिलहाल सबसे ताकतवर नेता और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय को भी सीएम पद का सशक्त दावेदार माना जा रहा है।
कहा यह भी जाता है कि सतीश उपाध्याय के इस पद तक पहुंचने के पीछे संघ का भी महत्वपूर्ण हाथ है। असल में आरएसएस के पसंदीदा होने की वजह से ही दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष का पद उन्हें मिला।
हालांकि हाल ही में स्वच्छता अभियान के दौरान खुद ही गंदगी फैला कर उसकी सफाई के मामले में नाम उलझने से उनकी दावेदारी कमजोर हुई है।
जगदीश मुखी
जगदीश मुखी: जगदीश मुखी के नाम को भाजपा से ज्यादा आम आदमी पार्टी ने उछाला है। हालांकि माना यह भी जाता है कि खुद मुखी के समर्थकों ने भी दिल्ली में यह अफवाह फैलाई कि भाजपा उन्हें दिल्ली के सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट कर सकती है।
बता दें कि जगदीश मुखी 2008-2013 के बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता रह चुके हैं। जो बात उनके विरोध में है वह है उनकी उम्र। फिलहाल मुखी की उम्र 74 साल है। जबकि मोदी 70 साल से ज्यादा की उम्र वाले व्यक्ति को पद देने के पक्ष में नहीं लगते।
डॉक्टर हर्षवर्धन
डॉक्टर हर्षवर्धन: पिछले विधान सभा चुनाव में बीजेपी ने हर्षवर्धन को अपना सीएम प्रत्याशी घोषित कर चुनाव लड़ा और पार्टी को न सिर्फ सफलता मिली बल्कि लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की।
जो बात इस बार हर्षवर्धन के पक्ष में नहीं जाती वह यह है कि वह पंजाबी समाज से ताल्लुक नहीं रखते। साथ ही चूंकि फिलहाल वह कैबिनेट में महत्वपूर्ण पद संभाल रहे हैं ऐसे में हो सकता है मोदी अपनी टीम में उन्हें बनाए रखना ही ज्यादा मुफीद समझें।
स्मृति ईरानी
स्मृति ईरानी: स्मृति ईरानी को राजनीतिक गलियारों में मोदी की छोटी बहन कह कर भी संबोधित किया जाता है। फिलहाल वह केंद्र सरकार की कैबिनेट में मानव संसाधन जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालती हैं।
माना जा रहा है कि मानव संसाधन में उनका काम कोई विशेष नहीं है और उन्हें इस पद से मुक्त भी किया जा सकता है। ऐसे में संघ की करीबी और मोदी का खास होने की चलते उन्हें दिल्ली के सीएम के तौर पर एक और मौका दिया जा सकता है।
हालांकि दिल्ली मानव संसाधन मंत्रालय में उनका पिछला काम ही उनके सीएम पद के लिए सबसे बड़ी बाधा भी बन सकता है।