दिल्ली विधान सभा चुनाव में भाजपा को एक बड़ा डर सता रहा है। इस डर से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने रणनीति बनाना भी शुरू कर दिया है।
असल में भाजपा उस वोट बैंक पर कब्जा जमाना चाहती है जो परंपरागत तौर पर कांग्रेस का माना जाता है। चूंकि पिछले विधान सभा से लेकर लोकसभा तक में कांग्रेस की लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आई है ऐसे में माना यह जा रहा है कि कांग्रेस के इस वोट बैंका का भी उससे मोहभंग हो रहा है।
दिल्ली में कांग्रेस के इस वोट बैंक के खिसकने से सबसे ज्यादा फायदा आम आदमी पार्टी को हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस के इस वोट बैंक को आप के पाले में जाने से रोकने और भाजपा की तरफ लाने के प्रयास पार्टी ने शुरु कर दिए हैं।
यह इलाका बदल सकता है सारी गणित
असल में माना यह जा रहा है कि दिल्ली में मुसलमान वोटरों का कांग्रेस से मोहभंग हुआ है और वह आम आदमी पार्टी की तरफ जा सकते हैं।
पिछले दिल्ली विधान सभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच महज चार सीटों का अंतर था। ऐसे में अगर मुस्लिम वोट आप के खाते में चले गए तो दिल्ली में बीजेवी सरकार बनाने के प्रयासों पर पानी फिर सकता है।
यही कारण है कि पार्टी ने दिल्ली के ऐसे छह विधान सभा सीटों को रेखांकित कर लिया है जहां मुस्लिम मतदाताओं का बर्चस्व है। पिछले विधान सभा चुनाव में इन छह में से चार सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था।
पार्टी ने तय किया है कि वह इन इलाकों में मोदी सरकार की उपलब्धियों के बारे में सरकार को बताने के साथ-साथ केजरीवाल सरकार की 49 दिनों की असफलताओं को भी जमकर उछालेगी। यानि इन इलाकों में भाजपा आम आदमी पार्टी से ही अपना सीधा मुकाबला मान रही है।
मुस्लिम बहुल इलाकों में भाजपा की बढ़त
इस बारे में दिल्ली भाजपा में अल्संख्यक सेल के प्रमुख आतिफ रशीद का कहना है कि मुस्लिम वोटरों को यह बताने की कोशिश करेंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन क्या है और विकास के बारे में भाजपा क्या सोच रखती है।
राशिद का कहना है कि पिछले विधान सभा चुनाव की तुलना में लोकसभा चुनाव में पार्टी की लोकप्रियता इन इलाकों में बढ़ी है। उनका कहना है कि ओखला में बीजेपी को विधान सभा चुनाव के दौरान 22000 वोट मिले थे जबकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को 39000 वोट मिले।
ऐसे ही त्रिलोकपुरी, सीमापुरी, मयूर विहार, बाबरपुर जैसे इलाके भी हैं जहां असल मुस्लिम मतदाता बहुमत में हैं। पार्टी ने इन इलाकों को विशेष ध्यान में रखते हुए न सिर्फ रणनीति बनाई है बल्कि वह मान कर चल रही है कि इस बार इन क्षेत्रों में उसका सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी से ही है।