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EXCLUSIVE: शक के घेरे में BSF इंस्पेक्टर, रशीद की थी जानकारी

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने मामले में बीएसएफ के एक इंस्पेक्टर से भी पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि  मामले में गिरफ्तार बीएसएफ के हवलदार अब्दुल रशीद के सुपरवाइजर इंस्पेक्टर को इसकी जानकारी थी।
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जासूसी प्रकरण में इंस्पेक्टर की मिलीभगत भी सामने आ सकती है। पुलिस सूत्रों की मानें तो मामले में तीन से चार लोगों की जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।

वहीं बीएसएफ के डीआईजी धर्मेंद्र पारिख ने किसी इंस्पेक्टर के पकड़े जाने की जानकारी से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जिस नाम के इंस्पेक्टर की बात की जा रही है उस पद पर उस नाम का कोई अधिकारी जम्मू में नहीं है।

इंस्पेक्टर को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा सकता है

वहीं सूत्रों का दावा है कि इंस्पेक्टर से जम्मू में ही बीएसएफ के बेस में पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि रशीद जिस सरकारी मेल का प्रयोग कर रहा था उसकी जानकारी इंस्पेक्टर को थी या नहीं।

दिल्ली पुलिस की टीम उससे पूछताछ करने के लिए जल्द ही जम्मू कश्मीर जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इंस्पेक्टर को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा सकता है।

वहीं मामले की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि अब्दुल रशीद उर्फ खान एक समय खूंखार आतंकवादी रहा है। बताया जा रहा है कि करीब तीन वर्ष तक वह आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा था।

रशीद ने पाकिस्तान में आतंकवाद की ट्रेनिंग भी ली थी

रशीद ने पाकिस्तान में आतंकवाद की ट्रेनिंग भी ली थी। अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि  रशीद वर्ष 1990 से  पहले आतंकवादी था।

बीएसएफ ने वर्ष 1990 में आतंकवाद का रास्ता छोड़कर बीएसएफ में भर्ती करने की स्कीम निकाली तो ये बीएसएफ में भर्ती हो गया। इसकी तैनाती गुजरात और पश्चिमी बंगाल में बॉर्डर पर रही।

वर्ष 1998 में इस तबादला जम्मू-कश्मीर में हो गया। वर्ष 2012 में इसकी तैनाती बीएसएफ की राजौरी स्थित विजिलेंस विंग में हो गई। इस विंग में गुप्त सूचनाएं काफी होती हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार रशीद कई बार गुप्त सूचनाएं सरकारी मेल से भेजता था।

देश भर में फैला हुआ था नेटवर्क

पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के जासूसी करने वाले इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। आरोपी जम्मू-कश्मीर ,असम, आंध्र प्रदेश, और गुजरात से भी सूचना इक्ट्ठा कर रहे थे।

इनके अलावा छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से लगे हुए इलाकों से भी सूचना इकट्ठा करने के लिए लोगों से संपर्क कर रहे थे। इन राज्यों में ये जिन लोगों से गुप्त सूचनाएं व दस्तावेज ले रहे थे उन आरोपियों की पहचान कर ली गई है। पुलिस की टीमें जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, छत्तसीगढ़, गुजरात और पश्चिमी बंगाल में समेत देश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही है।

दिल्ली पुलिस अधिकारिक रूप से कह रही है कि कैफेतुल्लाह वर्ष 2013 में पाकिस्तान गया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह कई बार पाकिस्तान जा चुका है। वह वर्ष 2015 में भी दो से तीन बार सरहद पार गया था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वह वीजा लेकर गया या फिर वह बार्डर पार करके।

बीएसएफ खुद उसे सौंप देगी

जासूसी मामले में बीएसएफ के एक इंस्पेक्टर से पूछताछ होने की बात को आईजी बीएसएफ राकेश शर्मा ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया राई का पहाड़ बना रहा है।

शर्मा ने कहा कि यदि पुलिस को लगता है कि बीएसएफ का कोई कर्मी इस मामले में शामिल है तो उसके दस्तावेज लाए और उसे ले जाए। उन्होंने कहा कि जिस बीएसएफ हवलदार को पकड़ा गया है, उसकी पहचान में कई ऐसे लोग होंगे जो बीएसएफ में हैं।

पर इसका यह मतलब नहीं कि वह जिसका नाम बताएगा उसको पुलिस पकड़ कर ले जाएगी। जांच अभी शुरुआती दौर में है और यदि किसी भी बीएसएफ कर्मी या अधिकारी के इस मामले में शामिल होने के प्रमाणित दस्तावेज मिलते हैं, तो उसे पुलिस पकड़ कर ले जा सकती है। बीएसएफ खुद उसे सौंप देगी।
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बीएसएफ का हेड कांस्टेबल सात दिनों के रिमांड पर

पाकिस्तानी की खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय दस्तावेज और सूचना देने के आरोप में गिरफ्तार बीएसएफ के निलंबित हेड कांस्टेबल अब्दुल रशीद को अदालत ने सात दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया। अदालत ने माना कि यह काफी गंभीर मामला है और आरोपी का रिमांड जरूरी है।

सोमवार को पटियाला हाउस अदालत स्थित मुख्य मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट संजय खगनपाल के समक्ष आरोपी रशीद को कड़ी सुरक्षा में पेश किया गया। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि रशीद बीएसएफ की सतर्कता विंग में कार्यरत था। उन्होंने कहा कि एक गुप्ता सूचना के आधार पर हाल ही में नई दिल्ली क्षेत्र से एक अन्य आरोपी कैफेतुल्लाह खान उर्फ मास्टर राजा को गिरफ्तार किया गया था। उससे पूछताछ से पता चला कि रशीद राजौरी क्षेत्र व अन्य स्थानों की भारतीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी आईएसआई को दे रहा था।

जांच अधिकारी ने कहा कि पूरी साजिश का पता लगाना जरूरी है। वहीं यह भी पता लगाना है कि गोपनीय दस्तावेज व अन्य जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए उन्हें किस प्रकार व कहां से पैसे मिलते थे। अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा कि क्या इस रैकेट में बीएसएफ को कोई वरिष्ठ अधिकारी भी लिप्त है या नहीं। इस पर उन्होंने कहा कि फिलहाल तो ऐसी सूचना नहीं है लेकिन जांच के बाद ही सही तस्वीर सामने आएगी।
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