फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस को अलविदा कहने के बाद भड़ाना ने खोले कई राज

Mon, 11 Aug 2014 08:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
फरीदाबाद से लोकसभा का चुनाव हारने और पार्टी में खुद को अलग-थलग पड़ने के बाद यह तय हो गया था कि कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना कभी भी पार्टी को अलविदा कह सकते हैं। हुआ भी यही।
विज्ञापन


फरीदाबाद और मेरठ से चार बार सांसद रहे भड़ाना ने पांच दिन पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उसी वक्त इंडियन नेशनल लोकदल ज्वाइन करने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब तक उन्होंने कोई नई पार्टी नहीं ज्वाइन की है। उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर ‘अमर उजाला’ ने खास बातचीत की। पेश है संवाददाता ओम प्रकाश से बातचीत के अंश:

सवाल: राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह चल रही है कि इस समय आप कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल दोनों से राज्यसभा जाने व अन्य मसलों पर सौदेबाजी कर रहे हैं?
विज्ञापन

उत्तर: किसी से कोई सौदेबाजी नहीं चल रही है। यहां से लेकर जम्मू-कश्मीर तक के अपने साथियों से विचार विमर्श कर रहा हूं। मुझे किसी पद का लालच नहीं है जो मैं सौदेबाजी करूं। असल में तो अभी तक मैं निर्णय नहीं कर पाया हूं कि किधर जाऊं।

सवाल: कांग्रेस में वापसी के लिए प्रदेश प्रभारी शकील अहमद ने बुलाया था क्या?
उत्तर: इस्तीफा भेजने के बाद मेरे पास मैडम सोनिया, राहुल भैया, प्रियंका और शकील अहमद का मैसेज आ गया था। कदम आगे बढ़ा दिया है इसलिए दोबारा कांग्रेस में जाने का सवाल ही नहीं है। मुझे शहीद होना मंजूर है, आत्महत्या करना नहीं। मैं तो सड़क की राजनीति करना जानता हूं। जनता के बीच रहूंगा।

सवाल: सुना है कि आपकी 16, जनपथ वाली कोठी इनेलो सांसद दुष्यंत चौटाला को अलॉट हो गई है। कहीं कोठी तो कांग्रेस पर भारी नहीं पड़ रही है?
उत्तर: चौटाला परिवार से मेरा 27 वर्ष पुराना रिश्ता है। चौधरी देवीलाल ने 1988-89 में बिना एमएलए बने मुझे छह माह के लिए हरियाणा का मंत्री बनाया था। दुष्यंत ने मुझसे पूछा था कि अंकल मैं यह कोठी अपने नाम अलॉट करवा लूं? इस पर मैंने हां कर दी थी। उनकी एक कोठी मेरी कोठी के साथ है। मेरा बेटा अर्जुन, दुष्यंत का दोस्त है। ऐसे में 16, जनपथ दुष्यंत के नाम से अलॉट होने पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जब तक कोठी में मैं बैठा हूं यह मेरी है। सुरक्षा कारणों के चलते यूं ही मेरी कोठी नहीं छीनी जा सकती है।

सवाल: मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से आपकी बिगड़ी कब से?
उत्तर: मैं भूपेंद्र सिंह हुड्डा से सीनियर हूं। गांधी परिवार के लिए हुड्डा से ज्यादा वफादार हूं। वर्ष 2009 के चुनाव के बाद जब हरियाणा में सीएम बनाने की बात चली तो मैं दावेदार था। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मेरा नाम दावेदारों में शामिल किया था। कई वरिष्ठ नेता मेरे दिल्ली स्थित आवास पर बैठक कर चुके थे। उसी समय से मैं हुड्डा की आंखों की किरकिरी बन गया था। इसका बदला उन्होंने लोकसभा चुनाव में मुझे हरवाकर लिया।

सवाल: क्या आपने सरकार से कभी कोई कारोबारी या अन्य फायदा उठाया?
उत्तर: मैंने तीन दशक की राजनीति में कभी ऐसा नहीं किया। पिछले पांच साल में यहां हुड्डा से सबसे ज्यादा फायदा केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, उनके एक व्यापारी साथी, सीएम का पलवल में रिश्तेदार और उसके एक साथी ने सीएलयू (भूमि उपयोग परिवर्तन) करवाकर उठाया है। समय आने पर मैं सीएलयू का पर्दा उठाऊंगा। तब पता चलेगा कि सत्ता का फायदा किसे मिला है। हुड्डा साहब इस समय हरियाणा में भाजपा की सरकार बनवाने के लिए काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें