आम आदमी पार्टी द्वारा बुलाए गए दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में ईवीएम जैसी मशीन को कैसे हैक किया जा सकता है इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रेटर कैलाश से पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने पार्टी की तरफ से यह बताया कि कैसे मशीन की कोडिंग बदलकर के उसको कोई भी इंजिनियर आसानी से हैक कर सकता है।
डेमो की शुरूआत करते हुए सबसे पहले सौरभ ने सबसे पहले मॉक पोलिंग की जैसे कि आमतौर पर चुनाव आयोग चुनाव शुरू होने से पहले पोलिंग एजेंट के सामने करके दिखाता है। उसमें सभी पर वोट की गिनती सही तरीके से आती है।
सौरभ ने कहा कि जब चुनाव खत्म हो जाता है उसके बाद मशीन को सील कर दिया जाता है। मशीन सील करने के बाद स्ट्रांग रुम में रख दी जाती है। लेकिन मतगणना से पहले चुनाव आयोग के अधिकारी उसमें पार्टी विशेष का सीक्रेट कोड को बदल देते हैं।
प्रमुख बातेंः-
- ईवीएम में हर पार्टी का सीक्रेट कोड होता है। सीक्रेट कोड की मदद से छेड़छाड़ संभव।
-भिंड में जो मशीन आई थी, वो यूपी से आई थी। उसमें वीवीपैट था और जो भी कोई वोट डालता था, वो बीजेपी को जाता था।
-मैंने सभी बड़ी बड़ी कंपनियों में काम किया है और मैं सभी बड़े से बड़े साइंटिस्ट को चैलेंज करता हूं।
बीजेपी ने इंजिनियर सीएम को मौका दे दिया।
-तीन घंटे में आसानी से कोई भी ईवीएम को हैक कर सकता है। गुजरात में जो मशीन चुनाव के लिए दी जानी है उनको हमें दे दो, हम पूरा चुनाव बदल दे सकते हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।
-ईवीएम का केवल मदरबोर्ड चेंज करना है, बाकि काम अपने आप काम हो जाएगा।
-अगर इन मशीनों से चुनाव होता है तो भाजपा को कभी भी कोई नहीं हरा सकता है।
-दुनिया के अंदर कोई भी ऐसी मशीन नहीं है जो हैक नहीं हो सकती है।
- क्रिकेट मैच फिक्सिंग की तरह ईवीएम की भी फिक्सिंग संभव
- मशीन का डेमो देखने के लिए जदयू, टीएमसी, राजद और सीपीएम के नेता विधानसभा में मौजूद हैं।
-ईवीएम में छेड़छाड़ के मुद्दे पर अलका लांबा ने कहा कि अगर मशीन पर शक है तो क्या उसकी जांच नहीं होनी चाहिए।
-नई ईवीएम होते हुए भी एमसीडी के चुनाव पुरानी मशीन से क्यों हुए। ईवीएम की वजह से ही दिल्ली एमसीडी के चुनाव में भाजपा जीत गई थी।