पूर्वी दिल्ली की लक्ष्मी नगर विधानसभा सीट परिसीमन के बाद साल 2008 में अस्तित्व में आई। इस सीट ने हर बार नए चेहरे को मौका दिया। पहली बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतकर आए डॉ. अशोक कुमार वालिया शीला दीक्षित की सरकार में मंत्री तक बने।
लक्ष्मी नगर सीट पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दो बार जीत दर्ज कर चुके हैं, लेकिन पार्टी ने दोनों बार उम्मीदवार बदले। वहीं भाजपा और कांग्रेस भी सीट पर खाता खोल चुकी हैं। परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई लक्ष्मी नगर विधानसभा सीट पॉश इलाकों में गिनी जाती है। लक्ष्मी नगर, शकरपुर, पांडव नगर, मंडावली सहित दूसरे इलाके सीट के बड़े बाजारों में शुमार हैं। वहीं स्कूल ब्लॉक सहित दूसरे क्षेत्र विकसित अनधिकृत कॉलोनियों के इलाके हैं। परिसीमन से पहले इस सीट को मंडावली के नाम से जाना जाता था। परिसीमन के बाद सीट का नाम बदला गया। साथ ही मंडावली सहित आसपास के कुछ हिस्से हटाए गए।
परिसीमन से पहले दो बार कांग्रेस का कब्जा रहा
परिसीमन से पहले इस सीट पर दो बार कांग्रेस का कब्जा रहा। विधानसभा के गठन के बाद पहली बार 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में सबसे पहले भाजपा के एमएस पंवार ने यहां चुनाव में जीत दर्ज की। उसके बाद साल 1998 और साल 2003 में हुए चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर मीरा भारद्वाज ने जीत दर्ज की। यह सभी मंडावली विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे।
लोगों ने कहा...
लक्ष्मी नगर, शकरपुर, स्कूल ब्लॉक सहित आसपास के क्षेत्रों में अतिक्रमण की समस्या है। लोगों ने दुकानों के आगे के हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है, जिस कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। इसके अलावा जाम की भी समस्या बनती है।
-प्रीति कुमारी
मधुबन रोड के आसपास के क्षेत्रों में सीवर जाम की समस्या है। अक्सर यहां सीवर जाम के कारण सड़क पर एक-एक फीट पानी भर जाता है। बरसात के दौरान अक्सर लोग परेशान होते हैं। यहां से गुजरने वाली सड़कों से निकलना मुश्किल हो जाता है।
- हितेश शर्मा
विकास मार्ग पर पार्किंग की समस्या को दूर करने के लिए कई कोशिश की गईं, लेकिन फायदा नहीं हुआ। लोग सड़क पर ही वाहन खड़े कर चले जाते हैं। अवैध पार्किंग के कारण विकास मार्ग पर जाम लगता है।
-निशांत शर्मा