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महंगा न पड़ जाए भुगतान: दिल्ली में रोजाना 142 लोग हो रहे UPI के जरिए ठगी का शिकार, सुरक्षित रहने का तरीका एक

Sat, 12 Oct 2024 07:41 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि इसी साल मई में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ट्रांजैक्शंस ने रिकॉर्ड बनाया, जिसमें 14.04 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शंस हुई। इसकी वैल्यू लगभग 20.45 लाख करोड़ डॉलर है। 
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यूपीआई से हो रहे ठगी के शिकार - फोटो : adobe
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विस्तार
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मौजूदा समय में हर दूसरा या तीसरा व्यक्ति यूपीआई के जरिये लेन-देन करता है। इसी के चलते यूपीआई यूजर साइबर ठगों के निशाने पर हैं। राजधानी दिल्ली में स्थिति यह है कि यहां हर दिन औसतन 142 यूपीआई यूजर के साथ ऑनलाइन ठगी हो रही है। इस साल एक जनवरी से लेकर 30 जून तक दिल्ली पुलिस को 25924 शिकायतें मिली हैं। बीते साल इसी समय अवधि के दौरान 24617 मामले सामने आए थे। यूपीआई के जरिये बढ़ते ठगी के मामलों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने लोगों सावधान और सतर्क रहने के लिए कहा है।

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दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि इसी साल मई में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ट्रांजैक्शंस ने रिकॉर्ड बनाया, जिसमें 14.04 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शंस हुई। इसकी वैल्यू लगभग 20.45 लाख करोड़ डॉलर है। चूंकि यूपीआई यूजर की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में लोगों के इसके इस्तेमाल में सावधानी और सतर्कता रखनी होगी। 

पुलिस अधिकारी ने बताया कि यूपीआई से जुड़े ठगी के मामलों में कई तरीके होते हैं। इसमें नकली पेमेंट स्क्रीनशॉट, नकली यूपीआई क्यूआर कोड, स्क्रीन मॉनिटरिंग ऐप आदि शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि किसी भी ट्रांजेक्शन को सीधे यूपीआई एप के जरिए वैरिफाई करें। दोस्त या परिवार के सदस्य द्वारा पैसे मांगने पर उस व्यक्ति की पहचान को वैरिफाई करें। जल्दबाजी में किसी क्यूआर कोड को स्कैन कर पैसे न भेजें, बल्कि क्यूआर स्कैन करने के बाद उसके नाम को ध्यान से देखें और उसके बाद ही भुगतान करें।

ऐसे होती है यूपीआई से ठगी
ठग द्वारा पीड़ित को नकली यूपीआई कोड भेजा जाता है। इसको स्कैन करने पर पीड़ित को गलत वेबसाइट्स या एप तक ले जाया जाता है। जहां पर पीड़ित की सारी फाइनेंशियल जानकारी को चोरी कर ली जाती है। इसके साथ ही कई एप ऐसे होते हैं, जो पीड़ित का मोबाइल या लैपटॉप का एक्सेस ठगों को दिला सकते हैं, जिनसे वह पीड़ित के डिवाइस के स्क्रीन पर चल रही सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड कर लेते हैं या डिवाइस पर चल रही गतिविधि लाइव देख सकते हैं।

ऐसे में पीड़ित की फाइनेंशियल जानकारी, ओटीपी आदि ठग के पास चली जाती है। इसके अलावा ठग पीड़ित को उसका कोई दूर का दोस्त या उसका रिश्तेदार बताता है और इस तरह बात करता है मानों वो किसी आपात स्थिति में फंसा हो और मदद के लिए जल्द से जल्द पैसे भेजने को कहता है। ऐसे में लोग जल्दबाजी में बिना सोचे-समझे या उस व्यक्ति की पहचान वैरिफाई किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इन सब के साथ ही ठगी एक नकली ट्रांजेक्शन स्क्रीनशॉट भी बनाते हैं। वह फिर पीड़ित को नकली ट्रांजेक्शन स्क्रीनशाॅट भेज कर यह कहते हैं कि उन्होंने गलती से ज्यादा पैसे भेज दिए हैं। इसके बाद वे पीड़ित को उस पैसे को वापस भेजने के लिए कहते हैं।
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यह हैं ठगी के आंकड़े...
वर्ष यूपीआई से ठगी के मामले इंटरनेट बैकिंग काॅल के जरिए ठगी
2024 25924 5312 5486
2023 24617 4728 4346

नोट : दोनों वर्ष के आंकड़े एक जनवरी से 30 जून तक के हैं।

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