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Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर से बचाव में वैक्सीन की एक डोज भी प्रभावी, साल 2010 से चल रही है निगरानी

Fri, 19 Jan 2024 08:08 AM IST
विजय पुंडीर राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

साल 2009 से देश में सर्वाइकल कैंसर के बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। 10 से 15 साल की उम्र में लड़कियों को उस समय वैक्सीन की तीन डोज दी जाती थी। एम्स दिल्ली सहित देश में दूसरे बड़े अस्पतालों में साल 2010 से ऐसी लड़कियों की निगरानी की गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए देश में मौजूद वैक्सीन की एक डोज भी प्रभावी है। एक डोज के बाद भी महिलाओं में प्रतिरक्षा के वही परिणाम दिख रहे हैं, जो तीन डोज के बाद मिलते थे। दरअसल साल 2009 से देश में सर्वाइकल कैंसर के बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। 10 से 15 साल की उम्र में लड़कियों को उस समय वैक्सीन की तीन डोज दी जाती थी। एम्स दिल्ली सहित देश में दूसरे बड़े अस्पतालों में साल 2010 से ऐसी लड़कियों की निगरानी की गई।

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निगरानी करने के बाद एक लंबे अंतराल के बाद डोज की संख्या तीन से घटाकर दो की गई। उसके बाद तीन डोज और दो डोज लेने वालों की दोनों तरह की निगरानी की गई। निगरानी में पाया गया कि जो परिणाम तीन डोज में मिल रहे हैं वही परिणाम दो डोज में भी मिल रहे हैं। इसके बाद विशेषज्ञों ने वैक्सीन की डोज की संख्या को घटाकर एक कर दिया। इसके बार फिर से निगरानी की गई। निगरानी के बाद भी यह पाया गया कि जो परिणाम तीन डोज के थे, वहीं परिणाम एक डोज के भी हैं। इस निगरानी प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एक डोज ही प्रभावी है।

एम्स में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. नीरजा भाटला ने कहा कि एम्स में साल 2010 से टीकाकरण के बाद लड़कियों की निगरानी कर रहे हैं। अभी तक के परिणाम बताते हैं कि सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ वैक्सीन की एक डोज भी प्रभावी है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए मौजूदा समय में तीन वैक्सीन मौजूद हैं। 

क्या है यह कैंसर
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में शुरू होता है। गर्भाशय का निचला हिस्सा जो योनि से जुड़ता है, यह कैंसर आम तौर पर समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होता है। गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में पूर्व-कैंसर परिवर्तनों से शुरू होता है और इलाज न किए जाने पर आक्रामक कैंसर में बदल जाता है।

देश में दूसरा सबसे बड़ा कैंसर
सर्वाइकल कैंसर देश में दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में साल 2020 में अनुमानित 1,23,907 नए मामले आए। 77,348 मरीजों की मौत हुई। यह भारतीय महिलाओं में दूसरा सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है।
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ऐसे करें बचाव
15 साल की उम्र तक : मासिक धर्म स्वच्छता और यौन स्वास्थ्य पर शिक्षा, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के खिलाफ टीकाकरण।
गर्भावस्था : पैप परीक्षण, एचपीवी डीएनए परीक्षण या एसिटिक एसिड (वीआईए)। गर्भाशय ग्रीवा के आक्रामक कैंसर से पीड़ित किसी भी आयु वर्ग की महिला का उपचार।

रोग के सामान्य लक्षण
  • अनियमित रक्तस्राव
  • रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव या योनि स्राव में वृद्धि
  • कभी-कभी कोई भी लक्षण न दिखना
तय हुए लक्ष्य
एम्स के डॉ. बीआरए आईआरसीएच में निवारक ऑन्कोलॉजी विभाग की सह-प्राध्यापक डॉ. पल्लवी शुक्ला ने कहा कि साल 2030 तक सर्वाइकल कैंसर के उन्मूलन के लिए तीन लक्ष्य रखे गए हैं। इसमें 90 फीसदी लड़कियों को 15 साल की उम्र तक पूरी तरह से एचपीवी टीका लगाया जाना। 35 से 45 साल की आयु में 70 फीसदी महिलाओं की उच्च गुणवत्ता के साथ एचपीवी परीक्षण से जांच व सर्वाइकल प्री-कैंसर और कैंसर से पीड़ित 90 फीसदी महिलाओं को उपचार प्रदान करना शामिल है।
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