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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद कर रहे पदोन्नति, आरटीआई कार्यकर्ता ने लगाई मुख्यमंत्री से गुहार

Mon, 13 May 2019 06:31 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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दूरस्थ शिक्षा पद्धति से तकनीकी डिग्री हासिल करने वाले अधिकारियों को पदोन्नत नहीं किए जाने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद फरीदाबाद निगम प्रशासन चार कार्यकारी अभियंताओं को पदोन्नत करने की तैयारी में लगा है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अपर सचिव ने इनकी पदोन्नति पर लिखित आपत्ति भी लगाई हुई है।

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बावजूद इसके लोकसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद इन चार कार्यकारी अभियंता पद के अधिकारियों को पदोन्नत किए जाने की तैयारी की जा रही है। यह आरोप लगाते हुए आरटीआई कार्यकर्ता विष्णु गोयल ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव हरियाणा को शिकायती पत्र भेज कर इसकी जांच शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी से कराने की मांग की है।
 
आरटीआई कार्यकर्ता विष्णु गोयल के अनुसार सिविल वाद संख्या (सी) 38220/2012 में तीन नवंबर 2017 को फैसला सुनाया। इसमें सर्वोच्च न्यायालय ने दूरस्थ शिक्षा पद्धति से तकनीकी डिग्री को अवैध घोषित किया था।
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न्यायालय ने 2001 से 2005 के बीच दूरस्थ शिक्षा पद्धति से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले अधिकारियों के लिए परीक्षा देने का विकल्प रखा था। इन लोगों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा काउंसिल (एआईसीटीई) की ओर से जून 2018 में आयोजित परीक्षा देनी थी।

विष्णु गोयल का आरोप है कि नगर निगम में कार्यकारी अभियंता धर्मसिंह, दीपक किंगर, आनंद स्वरूप और राधेश्याम ने दूरस्थ शिक्षा पद्धति से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। इन चारों अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर परीक्षा नहीं दी।

उनका आरोप है कि बावजूद इसके इन चारों अधिकारियों को अधीक्षण अभियंता पद पर पदोन्नत किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन फाइलों पर अतिरिक्त निदेशक अवर सचिव राजकुमार और सहायक धर्मपाल ने 18 जनवरी 2019 को यह इंगित करते हुए आपत्ति लगाई थी कि इन चारों की डिग्री एआईसीटीई से मान्य नहीं है।

उनका आरोप है कि इन आपत्तियों के बावजूद इन चारों को पदोन्नत करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहरलाल और मुख्य सचिव हरियाणा को शिकायती पत्र भेज कर मामले की जांच अतिरिक्त निदेशक मीनाक्षी राज से कराए जाने की मांग की है। 

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