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एक बार फिर लौट सकता है 'पोलियो वायरस' का खतरा, यूपी-महाराष्ट्र में अलर्ट

Sat, 29 Sep 2018 06:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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polio
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भारत के लिए स्वास्थ्य से संबंधित एक बुरी खबर है। जी हां, जिस पोलियो वायरस की समाप्ति को लेकर देश निश्चिंत था वही फिर से दश्तक दे सकता है। बता दें कि राजधानी से सटे गाजियाबाद स्थित मेडिकल कंपनी बायॉमेड द्वारा बनाई गई ओरल पोलियो वैक्सीन में टाइप-2 वायरस पाया गया है, जिसे पोलियो कहते हैं।

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इस खुलासे के बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि पोलियो फिर से दश्तक दे सकता है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि यह वैक्सीन महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में दोनों राज्यों को अलर्ट कर दिया गया है। 

पोलियो वैक्सीन में प्रतिबंधित टाइप-2 एंटीजन पाए जाने के मामले में शुक्रवार को बायोमेड प्राइवेट लिमिटेड के एमडी डॉ. एसपी गर्ग को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के निरीक्षक श्रीबाबू की तहरीर पर कंपनी के एमडी डॉ. एसपी गर्ग, बेटे पुनीत गर्ग, पत्नी कविता गर्ग, भाई राजेंद्र प्रसाद गर्ग और उनकी पत्नी कविता गर्ग के खिलाफ  ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 17 ए और बीए 27 ए और 36 एजी के तहत एफआईआर दर्ज की है। उधर, पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।
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पुलिस के मुताबिक गाजियाबाद की बायोमेड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी वर्ष 1995 से केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को पोलियो की वैक्सीन सप्लाई कर रही है। कंपनी वाराणसी, मिर्जापुर और गाजीपुर समेत देश के कई जिलों को सप्लाई करती है। कंपनी ने हाल में मार्च 2018 में सप्लाई की गई थी। 

मिर्जापुर में अगस्त 2018 में एक बच्चे के पैर में कमी पाई गई थी। जांच में पता चला कि बच्चे ने दो दिन पूर्व ही पोलियो की खुराक ली थी। चेक कराया तो पोलियो का टाइप-2 एंटीजन पाया गया था। इसके बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने मिर्जापुर और गाजीपुर से बायोमेड द्वारा सप्लाई वैक्सीन का सैंपल लिया। 

इसके साथ ही देश के अन्य राज्यों से सैंपल भरकर जांच के लिए हिमाचल स्थित कसौली प्रयोगशाला भेजे गए। जहां से एक सैंपल की रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिसमें टाइप-2 एंटीजन की पुष्टि हुई। आरोप है कि  बैच-10 का सैंपल सब स्टैंडर्ड पाया गया, जिसके बाद केंद्र सरकार के निर्देश पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने बृहस्पतिवार रात कविनगर में कंपनी के एमडी व अन्य डायरेक्टरों के खिलाफ  मुकदमा दर्ज कराया था। शुक्रवार को पुलिस ने डॉ. एसपी गर्ग को सीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

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कंपनी का उत्पादन कराया बंद 

डॉ. एसपी गर्ग
ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली का कहना है कि पोलियो वैक्सीन का उत्पादन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। साथ ही कंपनी की तरफ से यूपी, उत्तराखंड व तमिलनाडु को सप्लाई की गई वैक्सीन को वापस मंगाया जा रहा है।  
 
कंपनी का सालाना टर्नओवर 50 करोड़ 
शुक्रवार को डॉ. एसपी गर्ग को सीजेएम में पेश किया गया तो गाजियाबाद स्थित उप औषधि नियंत्रक कार्यालय के अधिकारियों ने पुख्ता तरीके से पैरवी की। कोर्ट में उनकी तरफ से भी वकील खड़ा किया गया, जिन्होंने तर्क दिया कि कंपनी द्वारा सप्लाई वैक्सीन का सैंपल फेल होना बड़ा अपराध है, जिसमें जमानत नहीं मिलनी चाहिए। उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कंपनी की पूरी कुंडली खंगाली शुरू कर दी। बताया गया है कि कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 50 करोड़ रुपये है। 

बाकी निदेशकों की गिरफ्तारी जल्द 
अधिकारियों की कोशिश है कि कंपनी से जुड़े बाकी निदेशकों की गिरफ्तारी भी जल्द हो। इस बीच बाकी निदेशकों की कुंडली खंगाली जा रही है। अभी तक की जानकारी से पता चला है कि कंपनी का स्वामित्व एक ही परिवार के सदस्यों के पास था। 11 मई 1972 को कंपनी की स्थापना हुई। उस वक्त डॉ. एसपी गर्ग एमडी व ऊषा गर्ग डायरेक्टर बनीं। उसके बाद राजेंद्र प्रसाद गर्ग को 8 नवंबर 1973 में डायरेक्टर बनाया गया। 12 दिसंबर 2005 को पुनीत गर्ग व 22 दिसंबर 2014 को कविता गर्ग डायरेक्टर के तौर पर कंपनी से जुड़ीं। 

बाकी वैक्सीन की भी होगी जांच 
मौजूदा वक्त में कंपनी की तरफ से नौ तरह की वैक्सीन बनाई जा रही है, जिसमें अधिकांश की सप्लाई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को की जा रही है। इसके साथ ही कुछ राज्य सरकारों को भी वैक्सीन सप्लाई हो रही है। सूत्रों का कहना है कि पोलियो की टाइप -2 वैक्सीन का सैंपल फेल होने के बाद कंपनी द्वारा सप्लाई की जा रही बाकी वैक्सीन की भी जांच कराई जा रही है। अगर उनका भी सैंपल सब स्टैंडर्ड मिलता है, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होना तय है।
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