डॉ. एसपी गर्ग
ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली का कहना है कि पोलियो वैक्सीन का उत्पादन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। साथ ही कंपनी की तरफ से यूपी, उत्तराखंड व तमिलनाडु को सप्लाई की गई वैक्सीन को वापस मंगाया जा रहा है।
कंपनी का सालाना टर्नओवर 50 करोड़
शुक्रवार को डॉ. एसपी गर्ग को सीजेएम में पेश किया गया तो गाजियाबाद स्थित उप औषधि नियंत्रक कार्यालय के अधिकारियों ने पुख्ता तरीके से पैरवी की। कोर्ट में उनकी तरफ से भी वकील खड़ा किया गया, जिन्होंने तर्क दिया कि कंपनी द्वारा सप्लाई वैक्सीन का सैंपल फेल होना बड़ा अपराध है, जिसमें जमानत नहीं मिलनी चाहिए। उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कंपनी की पूरी कुंडली खंगाली शुरू कर दी। बताया गया है कि कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 50 करोड़ रुपये है।
बाकी निदेशकों की गिरफ्तारी जल्द
अधिकारियों की कोशिश है कि कंपनी से जुड़े बाकी निदेशकों की गिरफ्तारी भी जल्द हो। इस बीच बाकी निदेशकों की कुंडली खंगाली जा रही है। अभी तक की जानकारी से पता चला है कि कंपनी का स्वामित्व एक ही परिवार के सदस्यों के पास था। 11 मई 1972 को कंपनी की स्थापना हुई। उस वक्त डॉ. एसपी गर्ग एमडी व ऊषा गर्ग डायरेक्टर बनीं। उसके बाद राजेंद्र प्रसाद गर्ग को 8 नवंबर 1973 में डायरेक्टर बनाया गया। 12 दिसंबर 2005 को पुनीत गर्ग व 22 दिसंबर 2014 को कविता गर्ग डायरेक्टर के तौर पर कंपनी से जुड़ीं।
बाकी वैक्सीन की भी होगी जांच
मौजूदा वक्त में कंपनी की तरफ से नौ तरह की वैक्सीन बनाई जा रही है, जिसमें अधिकांश की सप्लाई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को की जा रही है। इसके साथ ही कुछ राज्य सरकारों को भी वैक्सीन सप्लाई हो रही है। सूत्रों का कहना है कि पोलियो की टाइप -2 वैक्सीन का सैंपल फेल होने के बाद कंपनी द्वारा सप्लाई की जा रही बाकी वैक्सीन की भी जांच कराई जा रही है। अगर उनका भी सैंपल सब स्टैंडर्ड मिलता है, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होना तय है।