कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईफीएफओ) के क्षेत्रीय कार्यालय गुरुग्राम उन सैकड़ों लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की मुहिम में जुट गया है तो यहां के ट्रांसपोर्टरों के यहां काम करते हैं। संगठन का मानना है कि यहां काम करने वाले तकरीबन शत-प्रतिशत चालकों और खलासियों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है।
यह न तो ईपीएफओ के दायरे में आते हैं और न ही ईएसआई के दायरे में। ऐसे में उनका जीवन और जोखिम भरा हो गया है। गुरुग्राम में छोटे से बड़े काफी ट्रांसपोर्टर हैं। इन सभी को संगठन जल्द ही नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
औद्योगिक हब साइबर सिटी में 11 हजार से अधिक औद्योगिक यूनिटें हैं। तकरीबन सभी में माल ढुलाई का काम होता है जो ट्रांसपोर्टरों द्वारा किया जाता है। यहां कच्चे माल को लाने और बन माल को देश के कोने-कोने में पहुंचाया जाता है। इस काम में सैकड़ों की संख्या में चालक व खलासी लगे हैं।
इनका काम काफी जोखिम भरा रहता है। कई बार इन्हें दुर्घटनाओं का भी शिकार होना पड़ जाता है। उनके बाद उनके परिवार को काफी मुसीबत होती है। ऐसे में अगर वह सामाजिक सुरक्षा के दायरे में कवर हों तो परिवार को भी काफी सराहा मिल सकता है।
ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय गुरुग्राम के आयुक्त राजीव बिष्ट ने बताया कि ट्रांसपोर्टरों को अपने यहां काम करने वाले चालकों और खलासियों का ब्यौरा संगठन को देना होगा। जिससे उन्हें व उनके परिवार को फायदा मिले। उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा अभी ट्रांसपोर्टरों से अपील की जा रही है। जल्द ही उन्हें नोटिस भी जारी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि उद्योगों से भी अपील की जा रही है कि वह उसी ट्रांसपोर्टर को अपने कैंपस में प्रवेश दें जिनके चालक व खलासी ईपीएफओ व ईएसआई के दायरे में हों।