डूब क्षेत्र, अधिसूचित और कब्जा प्राप्त सरकारी जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। अब अतिक्रमण होने पर उस वर्क सर्किल के प्रोजेक्ट इंजीनियर असिस्टेंट और जूनियर इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार को प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण की अध्यक्षता में आयोजित बोर्ड बैठक में सभी वर्क सर्किल इंजीनियरों को भी बुलाया गया जिसमें मुख्य रूप से अतिक्रमण रोकने पर चर्चा हुई। बैठक में चेयरमैन ने कहा कि, किसी क्षेत्र में अतिक्रमण होता है तो सबसे पहले जेई, एई और पीई को पता चलना चाहिए।
अगर वे इसमें लापरवाही बरतते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, गांवों के आसपास बने अवैध फ्लैटों का समय से निर्माण न रोकने के लिए वर्क सर्किल को जिम्मेदार माना जा रहा है। बैठक में चेयरमैन ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान को और तेज करने का निर्देश दिया।
शहर के कूड़े को निस्तारित करने के लिए डोर टू डोर कलेक्शन पर भी चर्चा हुई। चेयरमैन ने मेकेनिकल स्वीपिंग मशीन से सड़कों की सफाई जल्द शुरू कराने को कहा है। दोनों ही प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर सफाई शुरू कराने का निर्णय लिया गया। शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर डस्टबिन लगाने के भी निर्देश दिए।
दस करोड़ रुपये की जमीन कराई मुक्त
प्राधिकरण ने सेक्टर-81 से सटे ककराला ख्वासपुर की जमीन से बुधवार को अतिक्रमण हटाया। करीब दस हजार वर्ग मीटर जमीन पर 70 से ज्यादा झुग्गियां बन गईं थीं। सुबह करीब छह बजे ही वर्क सर्किल सात के परियोजना अभियंता बीके सिंह के नेतृत्व में प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंच गई। तीन घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान छिटपुट विरोध का भी सामना करना पड़ा।
इस जमीन की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। अतिक्रमण हटाने केदौरान 100 से अधिक पुलिस व पीएसी के जवान तैनात रहे। बीकेसिंह ने बताया कि इस जमीन पर अवैध कब्जा करवाने वाले मुस्तकीन नामक व्यक्ति के खिलाफ मंगलवार को ही मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
निठारी से अवैध कब्जा हटाने गई टीम बैरंग लौटी
नोएडा के निठारी स्थित प्राधिकरण के 300 मीटर भूखंड पर अवैध कब्जा हटाने गई वर्क सर्किल दो की टीम को बैरंग वापस लौटना पड़ा। प्लॉट में एक दर्जन झुग्गियां बनी हुईं हैं। यहां रहने वाली महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया, जिसके चलते प्राधिकरण की टीम को वापस लौटना पड़ा। हालांकि दो दिन के भीतर इसे खाली करने को कह दिया गया है।