नोटबंदी के बाद विकास दर सुस्त हुई है और इसका असर नौकरियों पर भी पड़ा है। रोजगार के अवसरों में कमी ने सबसे ज्यादा युवाओं को प्रभावित किया है। देश में डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले लोगों में बेरोजगारी की दर 9.6 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
ऐसे में रोजगार के अवसर मुहैया कराना और भी गंभीर मुद्दा बन गया है। युवाओं को उम्मीद है कि वित्त मंत्री इस बजट में ऐसे उपाय करेंगे जिससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। मध्यम वर्ग जहां महंगाई और टैक्स के गणित में उलझा है तो वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली से युवाओं की अपेक्षाएं बिल्कुल अलग हैं।
युवाओं को बेहतर शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण तो चाहिए ही, साथ में उन्हें अच्छी नौकरी की भी दरकार है। गांव के पढ़े लिखे युवाओं से बजट पर चर्चा की गई। पेश है रिपोर्ट
सबसे बड़ी उम्मीद तो शिक्षा को लेकर ही है। कॉलेजों की कमी के चलते कुल युवाओं का पांचवां हिस्सा ही कॉलेज की दहलीज पर पहुंच पाता है। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 18 फीसदी है जबकि अमेरिका में 81, ब्रिटेन में 54, जापान में 49 और मलेशिया में 27 फीसदी तक है। शिक्षा में सकल नामांकन दर बढ़ाना जरूरी है। - कमल कौशिक, पूर्व छात्र नेता
प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा का हाल बेहद चिंताजनक है। आज भी गांव के स्कूलों में न शिक्षक है और न ही संसाधन। इस बार बजट से शिक्षा के बुनियादी ढांचे में बदलाव की उम्मीद है।
साथ ही बजट से न सिर्फ उच्च शिक्षा के संस्थानों के विस्तार किया जाए। बल्कि कम फीस पर बेहतर शिक्षा के लिए जरूरी उपायों भी करने चाहिए। एजुकेशन लोन को छात्रों के और अनुकूल बनाया जाना चाहिए।- प्रवीन अत्री, गांव मोहना
नोटबंदी के चलते रोजगारों पर असर पड़ा है। कई कंपनियों ने युवाओं को सड़क पर ला दिया है। 15 से 29 वर्ष की उम्र के बीच युवक और युवतियों का शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी का औसत काफी अधिक है। बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है।
सर्वाधिक बेरोजगारी डिप्लोमा धारकों में है। उम्मीद है कि सरकार सूचना प्रौद्योगिकी, फूड प्रोसेसिंग, रिटेल मैनेजमेंट और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में नौकरियां बढ़ाने के उपाय करेगी।- धर्मेंद्र शर्मा, अलावलपुर
भारत में भी युवाओं का रुझान फेसबुक और ट्वीटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्टफोन के प्रति युवाओं की दीवानगी स्वाभाविक है। वे सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद चाहते हैं। डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए सरकार को इस बार बजट में इस ओर ध्यान देना होगा।- देवन भारद्वाज, हीरापुर
खेलों को मिले बढ़ावा
शहर के साथ गांव में शिक्षा का स्तर सुधारने की तरफ सरकार को ध्यान देना होगा। शिक्षा के साथ खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार को बजट में प्रावधान करना चाहिए, क्योंकि खेल के क्षेत्र में भारत विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ रहा है और इसमें रोजगार के अवसर पर पैदा हो रहे हैं।- रजनीश, युवा पुरस्कार विजेता