एक अप्रैल से एफएसए (फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट) में करीब 63.76 पैसे प्रति यूनिट कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की गई है, लेकिन इसके बाद भी हरियाणा के उपभोक्ताओं को पड़ोसी राज्य दिल्ली व उत्तर प्रदेश के मुकाबले बिजली दरों का ज्यादा बोझ झेलना होगा।
राज्य की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के औद्योगिक, व्यापारी व कर्मचारी संगठन फ्यूल सरचार्ज वसूली को गलत बताते हुए इसे खत्म करने की मांग उठाने लगे हैं। पहले फ्यूल सरचार्ज 1.24 रुपये प्रति यूनिट वसूला जा रहा था, जिसे घटाकर 65 पैसे प्रति यूनिट किया गया है।
30 जून के बाद फ्यूल सरचार्ज की दरें 37 पैसे प्रति यूनिट हो जाएंगी, लेकिन इसके बाद भी हरियाणा की बिजली दिल्ली और यूपी से महंगी पड़ेगी। महीने में 200 से 250 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले के उपभोक्ताओं को दिल्ली के मुकाबले 20 फीसदी अधिक भुगतान करना पड़ेगा, जबकि यूपी के मुकाबले 14 फीसदी तक ज्यादा बिल देना होगा।
जानकारों की मानें तो फ्यूल सरचार्ज वसूला ही नहीं जाना चाहिए, क्योंकि जब इसे लगाना शुरू किया गया था तब हरियाणा में बिजली की कमी थी, लेकिन अब तो राज्य के पास सरप्लस बिजली है। ईंधन खर्च ही नहीं हो रहा तो फ्यूल सरचार्ज का बोझ उपभोक्ता की जेब पर क्यों डाला जा रहा है।
स्लैब ने बढ़ाया जेब पर बोझ
1 अप्रैल 2015 से लागू हरियाणा के नए टैरिफ प्लान में बिजली दरों के स्लैब में जिस तरह उलफेर की गई है, उससे घरेलू उपभोक्ताओं पर सबसे अधिक बोझ पड़ा। अगर बात करें राजधानी दिल्ली की तो वहां 200 यूनिट तक एक ही दर से उपभोक्ताओं को भुगतान करना होता है, जबकि 201 से 400 यूनिट तक 48 फीसदी अधिक दर चुकानी पड़ती है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में 0 से 150 और 151 से 300, इसके बाद 301 से 500 और अंतिम स्लैब 500 से ऊपर बिजली खपत करने वालों का है। वहीं, हरियाणा में दो श्रेणियां निर्धारित हैं। 0 से 50 यूनिट तक पहला स्लैब और 51 से 100 यूनिट तक दूसरा स्लैब तय है। अगर 100 यूनिट का आंकड़ा पार किया तो उपभोक्ता को दूसरी श्रेणी के आधार पर 0 से 150 यूनिट तक बिल का भुगतान करना पड़ता है। हरियाणा में फिक्स चार्ज भी दिल्ली व यूपी के मुकाबले अधिक है।
हरियाणा में महंगी बिजली औद्योगिक विकास में बड़ी बाधा है। सरकार लाइनलॉस कम करे, डिफाल्टिंग अमाउंट नियमित रूप से वसूले तो बिजली की दरें अन्य राज्यों से सस्ती हो जाएंगी। फ्यूल सरचार्ज को पूरी तरह से खत्म किया जाना चाहिए। इसे लगाने का कोई औचित्य नहीं है।-जीएस त्यागी, अध्यक्ष-फरीदाबाद स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
गलत नीतियों की वजह से बिजली निगम घाटे में जा रहा है। फ्यूल सरचार्ज कम नहीं बिल्कुल खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि जब ईंधन खर्च ही नहीं किया जा रहा तो उसका खर्च उपभोक्ताओं से क्यों वसूला जा रहा है। बिजली की दरें कम हो जाएं तो लाइनलॉस भी कम हो जाएगा।-सुभाष लांबा, वरिष्ठ उपप्रधान-ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन
यह तो वही बात हुई कि एक जेब में डाला और दूसरी जेब से निकाल लिया। जब फ्यूल सरचार्ज लगना ही नहीं चाहिए तो इसे कम कर राहत देने का ढिंढोरा क्यों पीटा जा रहा है। एक तो उलटा सीधा स्लब और उस पर तरह-तरह के टैक्स वसूले जा रहे हैं। राहत आखिर किसे मिली है।-राम जुनेजा, अध्यक्ष-अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल
दिल्ली में घरेलू बिजली दरें
यूनिट एनर्जी चार्ज
0-200 4 रुपये / यूनिट
201-400 5.95 रुपये / यूनिट
401-800 7.30 रुपये / यूनिट
801-1200 8.10 रुपये / यूनिट
1200 से ज्यादा 8.75 रुपये / यूनिट
यूपी में घरेलू बिजली दरें
यूनिट एनर्जी चार्ज
0-150 4.40 रुपये / यूनिट
151-300 4.95 रुपये / यूनिट
301-500 5.60 रुपये / यूनिट
500 से ज्यादा 6.20 रुपये / यूनिट
हरियाणा में घरेलू बिजली दरें
यूनिट एनर्जी चार्ज
0-50 2.70 रुपये / यूनिट
51-100 4.50 रुपये / यूनिट
0-150 4.60 रुपये / यूनिट
151-260 5 रुपये / यूनिटं
251-500 6.05 रुपये / यूनिट
500 से ज्यादा 6.75 रुपये / यूनिट