नोएडा के सरकारी विभागों में लापरवाही की एक बानगी देखिए। विद्युत निगम को एक मामले में 16 साल बाद अपने बकाये की याद आई।
अब वसूली करनी थी तो ब्याज सहित पूरा बिल तहसील, दादरी के जरिये फैक्ट्री मालिक को भेज दिया गया। लेकिन बिल भेजते समय यह पेंच नहीं देखा गया कि 12 साल पहले फैक्ट्री बिक चुकी है। मजे की बात है कि पुराने आवंटी का बकाया नोटिस नए आवंटी को थमा दिया गया है, जिससे मामला और उलझ गया है।
मामला कुछ ऐसा है कि सेक्टर-10 के सी ब्लाक में मेसर्स साईप्रोग्राफिक नाम से एक औद्योगिक इकाई है। यह इकाई 1998 में मेसर्स नेगेटिब ड्रग से खरीदी गई है। इसके बाद 1998 में विद्युत विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र ले कर फैक्ट्री का ट्रांसफर हो गया।
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साथ 2002 में बिजली का कनेक्शन भी मेसर्स साईप्रोग्राफिक ने अपने नाम करवाकर समय पर बिलों का भुगतान करना शुरू कर दिया। अब 16 साल के बाद विद्युत निगम ने तहसील दादरी के जरिये 2,19,304 रुपये बकाये (मेसर्स नेगेटिब ड्रग) की वसूली का नोटिस मेसर्स साईप्रोग्राफिक को थमा दिया है।
मामले को लेकर उद्यमियों ने जिलाधिकारी एवी राजामौली से मुलाकात की। उद्यमी संगठन एनईए के प्रवक्ता सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि जब विद्युत निगम से एनओसी जारी कर दी गई तो 12 साल बाद नोटिस भेजने का औचित्य नहीं है। जिलाधिकारी एवी राजामौली ने मामले की जांच करने का आश्वासन दे दिया है।