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एक ऐसे नेता जिन्होंने नेहरू-इंदिरा और राजीव तीनों संग किया काम, जब लड़े तब जीते चुनाव

Sat, 14 Jan 2017 11:30 AM IST
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा
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रामचंद्र व‌िकल - फोटो : अमर उजाला
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करीब 65 साल पहले भी गौतमबुद्घ नगर (दादरी क्षेत्र) राजनीति का गढ़ हुआ करता था। यहां गुर्जर नेता रामचंद्र विकल ने लोगों को राजनीति का ककहरा सिखाया था। उन्होंने 1952 में पहला चुनाव लोगों से मिले 2000 रुपये चंदे से लड़ा था।
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  उसमें भी 400 रुपये बच गए थे और जिसे उन्होंने पार्टी फंड में डाल दिया था। आज जब नेता पार्टी में पद पाने के लिए एक दूसरे की कब्र खोदने में जुट जाते हैं। वहीं रामचंद्र विकल ने मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे रामचंद्र विकल का जन्म गौतमबुद्घ नगर की दादरी तहसील क्षेत्र के बसंतपुर नया गांव में 8 नवंबर 1916 को हुआ था। उन्होंने आजादी के बाद पहला चुनाव 1952 में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में दादरी विधान सभा क्षेत्र से लड़ा था और पहली बार विधायक बने थे। दूसरा चुनाव सिकंदराबाद विधान सभा से 1957 में लड़े और विजयी हुए थे।
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चार बार लगातार बने व‌िधायक

ramchandra vikal - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 1962 में फिर दादरी और 1967 में सिकंदराबाद से विधान सभा का चुनाव जीते थे। इसी बीच उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। वह किसान मजदूर पार्टी के विधानसभा के नेता चुने गए।
  मुख्यमंत्री पद के लिए उनको चुना गया था, मगर चौधरी चरण सिंह को कुछ लोगों ने सीएम पद के लिए आगे किया तो उन्होंने बिना किसी बात के विधानसभा के नेता पद से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री के लिए चौधरी चरण सिंह को स्वयं ही मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर दी। हालांकि चौधरी चरण सिंह ने उन्हें डिप्टी सीएम बनाया था।
1971 में फिर चुनाव हुआ तो प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 1971 में बागपत से लोकसभा चुनाव लड़ा और इसमें प्रचार करने के लिए स्वयं इंदिरा गांधी बागपत पहुंची थीं। यहां पर लोकदल के रघुवीर को हराकर सांसद बने थे।
  रामचंद्र विकल लोकसभा, राज्य सभा और विधान सभा तीनों सदनों के सदस्य रहे। वह ऐसे नेता थे जिन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और 1985 में राजीव गांधी के साथ काम किया। उनके प्रचार के लिए इंदिरा गांधी कई बार दादरी क्षेत्र में आई थीं। 26 जून 2011 को उन्हाेंने अंतिम सांस ली।
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उनके बताए रास्तों पर चलना ही उद्देश्य

इंद‌िरा गांधी और नेहरु - फोटो : सोशल मीड‌िया
रामचंद्र विकल के पुत्र जगवीर विकल (पूर्व एमएलसी) ने बताया कि उनके पिता ने कुछ ऐसे नियम बना रखे थे कि वह हर रोज कुछ भी हो लेकिन 1955 से ही योग करना शुरू कर दिया था। उनके बताए रास्तों पर चलना और उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाना ही उनका उद्देश्य है। 

तब पार्टी चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशियों को बुलाती थी
समाजसेवी डॉ. आनंद आर्य बताते हैं कि आज राजनीति पूरी तरह स्वरूप बदल चुकी है। एक  समय था जब पार्टी प्रत्याशियाें को चुनाव लड़ाने के लिए स्वयं बुलाकर टिकट देती थी और कार्यकर्ता चुनाव जिताकर भेजते थे। आज मोटी रकम देकर टिकट लिया जाता है। 1950-60 के दशक में राजनीति लोगों की सेवा के लिए की जाती थी और 80 के दशक के बाद राजनीति स्वार्थ के लिए हो गई।
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