फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सत्ता का वेलेंटाइन वीक बना राजधानी चुनाव

विज्ञापन
विज्ञापन
चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा मध्यावधि चुनाव के लिए सरकार गठन की ऐसी तिथि दी है जो कि सत्ता मिलने वाले दल को एक के साथ एक का ऑफर की तर्ज पर सत्ता के साथ वेलेंटाइन डे मनाने का मौका देगी।
विज्ञापन


वैसे तो सभी दल चुनाव को लेकर काफी समय से तैयारी में जुटे थे, लेकिन अब मात्र 26 दिन मिलने से तीनों दलों के लिए करो या मरो की स्थिति मानते हुए तीनों दलों के रणनीतिकार अपनी रणनीति बदलने में जुट गए हैं।

दिल्ली में 7 फरवरी को मतदान होगा 10 को मतों की गणना और 14 फरवरी को सरकार का गठन। यानी जिस तरह से पाश्चात्य संस्कृति के जिस पर्व वेलेंटाइन डे को भारत का युवा सात दिनों तक बढ़-चढ़कर विभिन्न दिनों के अनुसार मनाता है, उसी तर्ज पर इस बार सत्ता से वेलेंटाइन मनाने को राजनैतिक दलों की धड़कनें बढ़ी होंगी।
विज्ञापन

Trending Videos

करो या मरो की स्थिति में तीनो पार्टियां

चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा मध्यावधि चुनाव के लिए सरकार गठन की ऐसी तिथि दी है जो कि सत्ता मिलने वाले दल को एक के साथ एक का ऑफर की तर्ज पर सत्ता के साथ वेलेंटाइन डे मनाने का मौका देगी।

वैसे तो सभी दल चुनाव को लेकर काफी समय से तैयारी में जुटे थे, लेकिन अब मात्र 26 दिन मिलने से तीनों दलों के लिए करो या मरो की स्थिति मानते हुए तीनों दलों के रणनीतिकार अपनी रणनीति बदलने में जुट गए हैं।

दिल्ली में 7 फरवरी को मतदान होगा 10 को मतों की गणना और 14 फरवरी को सरकार का गठन। यानी जिस तरह से पाश्चात्य संस्कृति के जिस पर्व वेलेंटाइन डे को भारत का युवा सात दिनों तक बढ़-चढ़कर विभिन्न दिनों के अनुसार मनाता है, उसी तर्ज पर इस बार सत्ता से वेलेंटाइन मनाने को राजनैतिक दलों की धड़कनें बढ़ी होंगी।
विज्ञापन

कम समयसीमा में चुनाव होगा ऐतिहासिक

जानकारों के अनुसार, उन्हें ऐसा याद नहीं जब मात्र 26 दिन देकर भारतीय चुनाव आयोग ने किसी विधानसभा चुनाव को संपन्न कराने की तैयारी की हो। भाजपा, आप व कांग्रेस सरकार बनाने का दावा ठोंक रही हैं, लेकिन जिस तरह से तीनों के बीच तल्खी बढ़ी है उससे स्पष्ट है कि स्पष्ट बहुमत न मिलने की सूरत में गठबंधन की सरकार दिल्ली में बनाना काफी मुश्किल होगा।

ऐसे में स्पष्ट बहुमत के लिए दलों की लड़ाई करो या मरो जैसी स्थिति की तरह है। दरअसल, दल यह मानकर चल रहे थे कि मतदान का दिन फरवरी के मध्य में आएगा। लेकिन चुनाव घोषणा के 48 घंटे के भीतर अधिसूचना जारी होना किसी ने नहीं सोचा था।

अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जबकि अभी तक चुनाव घोषणा के बाद कम से कम 10 से 15 दिनों का समय इसके लिए मिलता था। इतना कम समय मिलना भी इस बार ऐतिहासिक है और राजनैतिक दलों की बेचैनी बढ़ गई है।

राजनैतिक दल चुनाव घोषणा के बाद लोकतंत्र के इस महाकुंभ को मनाने के लिए कम समय मिलने की बात तो कह रहे हैं लेकिन चुनाव कार्यालयों में इसके बाद अफरातफरी का माहौल बन गया है। तीनों ही दलों के नेताओं के बीच बैठकों का दौर मध्य रात्रि तक जारी रहने वाला है, इसके लिए मुख्य नेता व कार्यकर्ता तलब कर लिए गए हैं।

भाजपा व कांग्रेस के लिए तो सबसे बड़ी चिंता टिकटों की घोषणा को लेकर है। चुनाव घोषणा में मात्र 26 दिन मिलने पर दलों के रणनीतिकार अपनी रणनीति बदलने के लिए गुना-भाग में जुट गए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें