कांग्रेस के मतदान में हिस्सा नहीं लेने की स्थिति में जीत के लिए 133 मतों की जरूरत होगी। इस लिहाज से आप का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। मगर उसे क्रॉस वोट होने का डर सता रहा है। उसकी राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल उससे नाराज चल रही है। वह पिछले कई माह से अपनी पार्टी की दिल्ली और एमसीडी सरकार को घेरने में लगी है। लिहाजा उनके चुनाव में आप उम्मीदवारों को मत देने की संभावना नहीं दिख रही है। वहीं वार्ड समितियों के चुनाव में आप को तीन जोनों में क्रॉस वोट का सामना करना पड़ा था। उसके कुछ पार्षदों ने पार्टी उम्मीदवारों के बजाए भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान कर दिया था। साउथ जोन में उसके उम्मीदवार हारते-हारते बचे थे।
दूसरी तरफ, भाजपा भी इस चुनाव में पीछे हटने को तैयार नहीं है। एमसीडी में 15 सालों से काबिज भाजपा के लिए यह चुनाव अगले साल विधानसभा चुनाव होने के मद्देनजर काफी अहम है। हालांकि आम आदमी पार्टी की मजबूती के चलते भाजपा अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए जोरशोर से कोशिश कर रही है। भाजपा के नेता अभी भी किसी भी अप्रत्याशित समीकरण का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें वार्ड समितियों के चुनाव की तरह आप पार्षदों के क्रॉस वोट करने की उम्मीद है। अगर आप के 11 सदस्यों के क्रॉस वोट करने की स्थिति में उसे हार का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस के चुनाव में हिस्सा लेने की संभावना कम
एमसीडी में कांग्रेस के पास केवल आठ मत हैं, जो इस बार निर्णायक भूमिका में नहीं नजर आते। हालांकि कांग्रेस ने अभी तक चुनाव में हिस्सा लेने या न लेने पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। हालांकि कांग्रेस ने गत माह सदन में स्थायी समिति के एक सदस्य के चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव निरंतर आम आदमी पार्टी पर निशाना साध रहे हैं। इस कारण कांग्रेस के मेयर चुनाव में हिस्सा लेने की संभावना बहुत ही कम है।