निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा दी है। अब मतदाता 30 अक्तूबर तक अपने दावे और आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे। पहले इसकी अंतिम तारीख 30 सितंबर निर्धारित थी। अंतिम मतदाता सूची चार दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी, जो पहले चार नवंबर को प्रकाशित होनी थी।
यह संशोधित कार्यक्रम दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की ओर से 23 सितंबर को भेजे गए पत्र के बाद जारी किया गया है। पत्र में राष्ट्रीय राजधानी के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण के कार्यक्रम में संशोधन का अनुरोध किया गया था। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा भी एक महीने बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। पहले यह प्रक्रिया 30 अक्तूबर तक पूरी की जानी थी। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 31 अगस्त से शुरू हुई थी। यह समयसीमा ऐसे समय बढ़ाई गई है, जब दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी है। इससे पहले 97 लाख से अधिक मतदाताओं वाली प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी।
विसंगतियों पर जारी हुए नोटिस
मतदाता गणना प्रपत्रों में दी गई जानकारी में विसंगतियां मिलने पर 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जिनमें मतदाताओं के आंकड़ों का 2002 में हुए पिछले एसआईआर के दौरान तैयार मतदाता सूची से मिलान नहीं हो सका। इन विसंगतियों में पते की त्रुटियां या डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल हो सकती हैं। दिल्ली निर्वाचन विभाग ने मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है। यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रमुख मतदाताओं को भी नोटिस
पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख मतदाताओं को भी दिल्ली निर्वाचन विभाग की ओर से नोटिस मिले थे। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से अधिकांश लोगों के विवरण का क्षेत्रीय सत्यापन के जरिये सत्यापन कर लिया गया है। उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। यह सत्यापन प्रक्रिया सभी मतदाताओं के लिए समान रूप से लागू की गई।
मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने दोहराया था कि किसी मतदाता को नोटिस जारी किए जाने का यह मतलब नहीं है कि उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। नोटिस पाने वाले मतदाता संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या बूथ स्तर के अधिकारी के समक्ष अपना जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी नाम को मतदाता सूची से हटाया नहीं जा सकता। इसमें संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देना और उचित, कारणयुक्त तथा अपील योग्य आदेश पारित करना भी शामिल है। यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी मतदाता के नाम को मनमाने ढंग से न हटाया जाए।