राजनगर में हुआ हाईप्रोफाइल डबल मर्डर केस पुलिस फाइलों में ‘दफन’ हो गया है। पुलिस ने हार मानते हुए गुपचुप फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी है। एफआर कोर्ट भेज दी है।
तेज तरार्र इंस्पेक्टर और दरोगा खुलासे में लगाए गए। हजारों नंबर सर्विलांस पर लगाए। चार एसएसपी, चार एसपी सिटी और पांच से ज्यादा थानेदार तब से बदल गए। कविनगर थाने से केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हुआ, मगर कातिल को पुलिस नहीं तलाश पाई।
पॉश कालोनी राजनगर में डीएम और एसएसपी आवास केनजदीक यह सनसनीखेज हत्याकांड 8 मार्च 2013 को हुआ था। सुब्रमण्यम कुमार (62) और उनकी मां गिरिजा (85) की रक्तरंजिश लाश उनकी आर-14/52 कोठी में पड़ी मिली थीं।
बेटे की लाश किचन और मां की बेडरूम में थी। दोनों की गर्दन सब्जी काटने वाले चाकू और कैंची से काटी गई थी। मृतक बीएसएनएल से रिटायर्ड जूनियर टेलीकॉम अफसर थे।
उनके पिता वीआर सुब्रमण्यम दिल्ली टेलीकॉम में डीजीएम से रिटायर्ड हुए थे। वारदात से दो साल पहले उनकी मौत हो गई थी। यहां मां-बेटा ही रहते थे।
घटनास्थल से लग रहा था कि मां ने कातिल का विरोध किया था, उनकी उंगलियां कटी हुई थीं। एस कुमार चार भाइयों में सबसे बड़े थे।
उनसे छोटे भाई एस राज दिल्ली में रहते हैं, प्राइवेट कंपनी से रिटायर्ड हैं। एस चंद्र एनटीपीसी हैदराबाद और एस गणेश सिंडीकेट बैंक चेन्नई में कार्यरत हैं।