केंद्र सरकार ने सरकारी भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए लोकपाल की नियुक्ति की दिशा में आखिरकार अगला कदम बढ़ा ही दिया। सरकार ने लोकपाल के चयन के लिए एक 8 सदस्यीय सर्च कमेटी नियुक्त की है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के निर्देशन में ये 8 सदस्यीय कमेटी लोकपाल के चेयरमैन और 8 सदस्यों की तलाश करेगी।
सर्च कमेटी के अन्य सदस्यों में भारतीय स्टेट बैंक की पूर्व अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य, प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एएस किरण कुमार शामिल हैं। कार्मिक विभाग की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, इनके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सखाराम सिंह यादव, गुजरात पुलिस के पूर्व महानिदेशक शब्बीरहुसैन एस. खंडवावाला, राजस्थान कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ललित के. पंवार और पूर्व सालिसिटर जनरल रंजीत कुमार इस सर्च पैनल के अन्य सदस्यों के तौर पर मौजूद रहेंगे। उधर, कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोकपाल कानून में दिए निर्देशों के तहत ही लोकपाल चयन की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है।
कानून बनने के 5 साल बाद आगे बढ़ा कदम
बता दें कि लोकपाल की नियुक्ति के लिए समाजसेवी अन्ना हजारे के दिल्ली में लंबे अनशन के बाद दिसंबर 2013 में केंद्र सरकार ने लोकपाल व लोकायुक्त बिल पारित किया था, लेकिन करीब 5 साल बीतने के बावजूद इसकी नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट लगातार इस मामले में लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बना रहा है। इसके बावजूद सर्च कमेटी बनाने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी में विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति के कारण यह मुद्दा लटका हुआ था। लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को इस कमेटी में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया था, लेकिन उन्होंने विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं मिलने के कारण इसकी लगातार 6 बैठकों का बहिष्कार किया था। कांग्रेस के इस विरोध के बावजूद सर्च कमेटी का गठन हो जाने से लोकपाल की नियुक्ति को तेजी मिलने की उम्मीद है।
ये होगा लोकपाल का लाभ
लोकपाल के पास सेना को छोड़कर प्रधानमंत्री से लेकर नीचे चपरासी तक किसी भी जन सेवक (किसी भी स्तर का सरकारी अधिकारी, मंत्री, पंचायत सदस्य आदि) के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की सुनवाई का अधिकार होगा। साथ ही वह इन सभी की संपत्ति को कुर्क भी कर सकता है। विशेष परिस्थितियों में लोकपाल को किसी आदमी के खिलाफ अदालती ट्रायल चलाने और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी अधिकार होगा।