अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में आ रही बाधा पर संतों ने दिल्ली में मंथन किया। विश्व वेदांत संस्थान की अगुवाई में जुटे संतों ने एक स्वर से राम मंदिर का निर्माण जल्द कराने की मांग की। संतों ने प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति निवास की ओर कूच करने का प्रस्ताव भी पेश किया। कई संतों ने केंद्र इस मुद्दे पर सरकार के मौन धारण करने को लेकर भी सवाल उठाए।
दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज काशी ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट कुछ मामलों में रात में अपना फैसला सुना सकता है तो राम मंदिर निर्माण के मामले में देरी क्यों कर रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का भी अब विचार भी बदल रहा है। रामजन्म भूमि मामले में भी मोदी सरकार को अध्यादेश लाना होगा।
उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर तो सरकार चिंतित है, लेकिन राममंदिर निर्माण पर चुप है। संत समाज को प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति से उनके निवास स्थान पर जाकर मिलना होगा। स्वामी आनंद महाराज ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने धर्मांतरण को बढ़ावा देने का आरोप कांग्रेस पार्टी पर मढ़ा। महामंडलेश्वर नवल किशोर महाराज ने कहा कि संतों के चलते ही राष्ट्रभक्त व्यक्ति प्रधानमंत्री बना। अब वह निर्माण की तारीख बताए।
जैन मुनी ने कहा कि सद्भावना के माहौल में मंदिर निर्माण होना चाहिए। स्वामी ज्योर्तिमयानंद सरस्वती ने कहा कि कथनी करनी को जब हम एक कर लेंगे तभी निर्माण संभव होगा। फूलडोलजी महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री मौनी बाबा हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मंदिर निर्माण नहीं हुआ तो 2019 आ रहा है। संत समागम में सांध्वी अनादी, सांध्वी विभ्रानंद गिरी, स्वामी विवेकानंद सरस्वती समेत कई संतों ने शिरकत की। इस मौके पर जेके सुदर्शन को विश्व वेदांत संस्थान का राष्ट्रीय अध्यक्ष व राघव को राष्ट्रीय संगठन मंत्री बनाने की घोषणा की गई।