दिल्ली के तुगलकाबाद इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित बत्रा अस्पताल एवं मेडिकल रिसर्च सेंटर में गलत इंजेक्शन देने से करनाल की एक महिला की मौत हो गई थी। महिला का 14 साल तक बत्रा अस्पताल में स्तन कैंसर का इलाज हुआ था।
पुरानी मधुमेह और उच्च रक्तचाप बीमारी के दौरान श्वसनीशोध (ब्रोंकाइटिस) के इलाज के लिए महिला फिर दिल्ली आई थी। इसी दौरान गलत इलाज के कारण 2008 में महिला की मौत हो गई थी। इलाज में लापरवाही की शिकायत पर उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई की। फोरम ने अस्पताल को दोषी पाया और मृतका के परिजनों को आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
हरियाणा में करनाल के निवासी केके शर्मा ने फोरम में दी शिकयत में कहा कि उनकी पत्नी निर्मल शर्मा को 1994 में स्तन कैंसर हुआ था। उन्होंने तुगलकाबाद इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित बत्रा अस्पताल एवं ऐशीराम बत्रा पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्ट के मेडिकल रिसर्च सेंटर में उनका 14 साल तक कैंसर का इलाज डॉक्टर डी घोष से कराया।
वह पुरानी मधुमेह और उच्च रक्तचाप से भी ग्रस्त थीं। 26 मार्च 2008 में वे बत्रा अस्पताल में ब्रोंकाइटिस का इलाज कराने आई थीं। केके शर्मा के मुताबिक, बीमारी की जानकारी के बावजूद उनकी पत्नी के कई मशीनी स्कैन किए गए।