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आठ घंटे बिजली देने के सरकारी दावे फेल

Sat, 10 Dec 2016 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
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- फोटो : Demo Pic
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किसानों का कहना है कि यदि बिजली कर्मियों की जेब भर दें तो बिजली आठ घंटे की बजाये सोलह घंटे बिजली मिलती है। अन्यथा इतने कट कर्मचारी लगाते है कि एक दिन में दो घंटे से ज्यादा बिजली नहीं मिल पाती। आवाज उठाते है तो अधिकारी भी नहीं सुनते।
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फिलहाल पलेव व भूड़ बुझाई का काम चल रहा है। बीते सप्ताह घागस, शाहपुर, कंसाली, मूलथान, नोटकी, गुमटबिहारी दो से तीन घंटे बिजली ही क्षेत्र के किसानों को मिल पाई है। अक्सर सर्दियों में प्रत्येक साल कर्मचारी जानबूझकर बिजली की लाईनों को खराब कर देते है।

जब उनसे शिकायत करते है तो वे कहते है कि बिजली लाईऱ्न में फाल्ट है इसलिए आपूर्ति नहीं हो पा रही। कई बार तो कहते है कि फीडर पर अधिक लोड़ होने की वजह से लाईन नहीं उठ पा रही। फिलहाल गेंहू में भूड़ बुझाई का काम चल रहा है तो वहीं सरसों में भी पानी देने की आवश्यकता पड़ रही है।
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घागस के किसान याकूब खां बताते है कि आज सुबह बिजली आनी थी लेकिन पूरा दिन निकल गया। अभी तक नहीं आई। रोजाना यही हाल रहता है। मैंने अपने खेत में शनिवार को पानी चलाया था जो अभी तक एक एकड़ खेत ही नहीं भर पाया है।

किसान शौकत अली व साजिद ने बताया कि रात के हते में बिजली रात दस बजे आती है पांच या दस मिनट चलने के बाद छोड़ जाती है फिर रात में लगभग दो बजे से चार बजे तक बिजली आती है जिसमें भी कई झटके लगाती है। जिस कारण हमारी पूरी रात खराब हो जाती है और फिर भी हमारे खेतों पानी नहीं लग पाता है।

एक एकड़ को भराने में पांच से सात रात लग जाती है। और हम पूरी रात बिजली आने की बाट में जंगल में रहकर ही गुजारते है। एसडीओ राजकुमार यादव ने फोन पर बताया कि मरोड़ा फीडर पर खंबे खड़े करने काम चल रहा है।

वहीं तिगांव फीडर में भी कोई तकनीकी खराबी है जिसकी शिकायत मिली। इसके अलावा भादस फीडर के जिन गांवों के किसानों की बात हो रही है वहां धुध के कारण खराबी आई थी उसे ठीक करा दिया गया है।

कार्यकारी अभियंता बिजली निगम सतबीर सिंह ने बताया बिजली लाईनों को दुरूस्त करने का काम पूरा हो चुका है किसानों को शेड्यूल के हिसाब से आठ घंटे बिजली हर हाल में दी जायेगी। यदि कोई कर्मचारी जानबूझकर बिजली काटता है या समयानुसार नहीं देता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाई होगी।
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