एक वर्ष से भी कम अवधि में अरावली क्षेत्र में कई तेंदुओं की आकस्मिक मौत हो चुकी है। मगर वन्य जीवन चक्र को बड़ा झटका उस समय लगा जब कुछ दिनों पहले मानेसर के सहरावण गांव से सटे क्षेत्रमें एक नर तेंदुए की वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई।
वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञों का कहना है कि इस नर की मौत से अरावली क्षेत्र की कम से कम आठ मादा तेंदुआ विधवा हो गई हैं। इससे इनकी संख्या को बढ़ाने की कोशिश को बड़ा नुकसान हुआ है।
अरावली क्षेत्र में तेंदुओं की संख्यों का सही अनुमान अभी तक नहीं लगाया जा सका है। क्योंकि वर्ष 2011 के बाद से इनकी गिनती नहीं हुई है। फिर भी वाइल्ड लाइफ से जुड़े लोगों का कहना है कि इनकी संख्या 25 के करीब थी। इसमें से पांच से छह तेंदुओं ने अब तक अपनी जान गंवा दी है।
गुड़गांव के पूर्व कंजरवेटर आरपी बलवान बताते हैं कि अरावली क्षेत्र में नर तेंदुओं की संख्या काफी कम है। ऐसे में अगर किसी भी नर तेंदुए की मौत होती है जो यह काफी चिंता का विषय है। इस दिशा में वन्य जीव विभाग को पूरा ध्यान देना होगा।