नजफगढ़ झील आंशिक रूप से हरियाणा का गुरुग्राम के जिला और दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिला में स्थित है। यह पानी पर निर्भर पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी जलीय पक्षियों के आवास की स्थिति मानसून की बारिश पर निर्भर करती है। इस झील के पानी का मुख्य स्रोत साहिबी नदी थी।
बार-हेडेड गीज और ग्रेलैग गीज प्रवासी प्रजातियों में आई गिरावट : इस बार सेंट्रल एशिया से बार-हेडेड गीज, ग्रेलैग गीज, नॉर्थ एशिया से नॉर्दर्न शॉवलर, कॉमन टील, नॉर्दर्न पीनटेल, मध्य एशिया से गडवाल, यूरेशियन कूट, यूरेशियन वेगन व पूर्वी एशिया से ग्रेट कॉर्मोरेंट शामिल हैं। इसमें एडब्ल्यूसी के पर्यवेक्षकों ने पाया कि बार-हेडेड गीज और ग्रेलैग गीज जैसी प्रवासी प्रजातियों में काफी गिरावट आई है। जबकि नॉर्दर्न शॉवलर और कॉमन टील में मामूली वृद्धि देखी गई है।
यही नहीं, संकटग्रस्त कॉमन क्रेन और ऑस्प्रे के दुर्लभ दृश्य बताते हैं कि झील में अभी भी समृद्ध पक्षी विविधता की संभावना है। हालांकि, पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि हरियाणा और दिल्ली दोनों में अधिकारियों के समन्वित प्रयासों के बिना नजफगढ़ झील पक्षियों की श्रृंखला को बनाए रखने की अपनी क्षमता खो सकती है। वहीं, एनजीटी का आदेश है कि इसे आर्द्रभूमि के संरक्षित घोषित किया जाए, लेकिन किसी भी सरकार ने अभी तक इसे संरक्षित स्थल के रूप में दर्जा देने के लिए अधिसूचना जारी नहीं की है।